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सरकार ने मांगे नही मानी तो नाराज दलितों ने बदला अपना धर्म

जींद

हरियाणा के जींद में 113  दिनों से हड़ताल पर बैठे दलितों की जब सरकार ने मांगे नही मानी तो निराश होकर उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया। दिल्ली के लदाख बौद्ध भवन करीब 120 लोगों ने बौद्ध धर्म अपना लिया। दलितों का आरोप है कि  वे कई बार मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से मिलकर अपनी मांगे रख चुके है, लेकिन हर बार सरकार सिर्फ आश्वासन देती है, लेकिन मांगों को कभी पूरा नही करती।  उनका कहना है कि हम कोई नई मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि जो सरकार ने वादे किए थे उन्हीं को पूरा करने के लिए कह रहे हैं।वहीं इस पर विपक्ष ने भाजपा पर हमला बोला है। विपक्ष का आरोप है कि  दलित और अन्य समुदायों की उपेक्षा करना भाजपा की नीति है और इसलिए वे सरकार से नाखुश हैं और धर्म परिवर्तित करने को मजबूर हो रहे है।

झांसा गैंग रेप की सीबीआई जांच की जाए ।ईश्वर हत्याकांड के परिजनों को नौकरी दी जाए। जम्मू में शहीद हुए दलित के परिवार को भी नौकरी दी जाए और एससीएसटी एक्ट में अध्यादेश आदि दलितों की मांगे है, जिनको लेकर वे कई दिनों से जींद मे धरना प्रदर्शन कर रहे थे।लेकिन करीब तीन महिने से ज्यादा बीत जाने के बावजूद शासन-प्रशासन की तरफ से कोई आश्वासन नही दिया गया तो उन्होंने धर्म परिवर्तन करने का रास्ता अपनाया। दलितों का आरोप है कि हिन्दू समाज के ठेकेदार दलितों का शोषण करने लगे थे। ऐसे में धर्म परिवर्तन मजबूरी बन गया था। बौद्ध धर्म सिखाता है कि इंसान-इंसान में कोई भेदभाव नहीं है, सभी समान है। 

बता दे कि इससे पहले गुजरात के ऊना में करीब ४५० दलितों ने बौद्ध धर्म अपनाया था । दलितों का कहना था कि हमें हिंदू नहीं माना जाता है और हमें मंदिरों में प्रवेश करने की भी अनुमति नहीं है, इसलिए हमने बौद्ध धर्म अपना लिया है ,ताकी हमें भी समान अधिकार और समाज में जगह मिले।


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