सुषमा स्वराज के विमान से संपर्क टूटा, अधिकारियों के फूले हाथ-पांव

नई दिल्ली।

देश की विदेश मंत्री और विदिशा से सांसद सुषमा स्वराज इन दिनों मॉरीशस और दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर है। लेकिन शनिवार को अचानक उनके विमान मेघदूत से एटीएस का संपर्क टूट गया,जबकि सुषमा स्वराज का एयरक्राफ्ट इसके एयरस्पेस में आ चुका था जिसको लेकर अधिकारियों में हड़कंप मच गया। करीब 12-14 मिनट तक एयरक्राफ्ट से संपर्क टूटा रहा।, उसके बाद जाकर कही संपर्क हो सका।फिर जाकर कही अधिकारियों की जान में जान आई। वहीं दूसरी तरफ विदेश मंत्रालय ने इस विषय में जानकारी होने की बात से इनकार किया है।

एयरपोर्ट्स अथॉरिटी इंडिया के एक सीनियर अधिकारी ने जानकारी देते हुए कहा कि हमारे समुद्री एयरस्पेस, एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने प्लेन के गुम हो जाने का ऐलान करने के लिए करीब 30 मिनट का इंतजार किया। इसके बाद फ्लाइट के मॉरीशस के एयरस्पेस में प्रवेश करने के 12 मिनट बाद मॉरीशस अथॉरिटी ने अलार्म बटन दबा दिया, क्योंकि फ्लाइट से संपर्क नहीं हो पा रहा था। मॉरीशस ने फिर अलार्म की घोषणा की। इस अनिश्चितता का मतलब है कि विमान और उसके यात्रियों की सुरक्षा को लेकर कोई जानकारी नहीं है। इसके बाद उन्होंने चेन्नै एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क किया। लोकल एटीसी ने इसे चेन्नै एफआईआर (फ्लाइट इन्फॉर्मेशन रीजन) को पास कर दिया और चेन्नै ने मॉरीशस एफआईआर को। (एक प्लेन उड़ान के दौरान कई एफआईआर में रहता है, जिससे वह उस उड़ान क्षेत्र के संपर्क में रहता है।) एक बार जब अलार्म की आवाज आई, सभी लोग उस प्लेन को लेकर सतर्क हो गए, जिसके लिए वह अलार्म बजाया गया था। भारतीय एटीसी ने भी वीएचएफ के जरिए प्लेन से संपर्क करने की कोशिश की। एयरक्राफ्ट के लिए करीब शाम 4.44 पर अलार्म बजाया गया था, और एयरक्राफ्ट के पायलट ने मॉरीशस एटीसी से 4.58 पर संपर्क किया।

वही एटीसी के एक सीनियर अधिकारी ने बताया अनियमित वीएचएफ कॉम्युनिकेशन की वजह से समुद्री इलाकों में इस तरह की समस्या अक्सर आती है। कभी-कभी पायलट मॉरिशस एरिया में संपर्क करने में सफल नहीं होते तो कभी भूल भी जाते हैं। समुद्री क्षेत्र में रेडार कवरेज नहीं हैय़ ऐसे में सब कुछ वीएचएफ कम्युनिकेशन पर निर्भर है। बता दें कि जिन जगहों पर वीएचएफ कवरेज अच्छी नहीं है, उन्हें डार्क जोन कहा जाता है।