यहां दावेदारों की लम्बी सूची, बीजेपी और कांग्रेस के कई दिग्गज हैं चुनाव लड़ने को तैयार

नीमच। श्याम जाटव| विधानसभा चुनाव की तारीख जैसे-जैसे निकट आ रही चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों की सूची भी लंबी होती जा रही है। भाजपा और कांग्रेस पार्टी के अलावा आम आदमी और बसपा के प्रत्याशी भी अब सूची में शामिल हो गए हैं। इससे आने वाले समय में चुनाव रोचक हो सकते हैं। तीनों विधानसभा में अलग-अलग उम्मीदवारों के नाम सामने आ रहे हैं।

कांग्रेस की सूची लंबी

जिले की नीमच, जावद और मनासा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के नाम को लेकर कई उम्मीदवार चुनाव मैदान में है। नीमच से कांग्रेस जिलाध्यक्ष नंदकिशोर पटेल का नाम नीमच के राजनीतिक हल्कों में चल रहा है, लेकिन उन्हीं के पार्टी के लोग इस बात से इंकार कर रहे हैं कि उन्हें जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी देकर विधायक पद से अलग करने की व्यवस्था कर दी है। श्री पटेल चुनाव लड़ने के इच्छुक तो हैं, लेकिन चुनाव में हारने के बाद उनकी सक्रियता अपने घर-कार्यालय तक सिमित रही। इसके अलावा जिलाध्यक्ष का पद मिलने के बाद केवल सांसद के दौरे के दौरान वे मैदान में नजर आए। इससे पार्टी हाईकमान किस प्रकार फैसला करेगा यह निर्णय होना बाकी है। दूसरे स्थान पर रघुराजसिंह चैरड़िया का नाम आता है। श्री चैरड़िया 10 साल तक नपा अध्यक्ष रहे और जैसे-तैसे करके विधानसभा का टिकिट भी ले आए, लेकिन चुनाव हार गए। अब फिर एक बार जोर आजमाईष कर रहे हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव हारने के बाद श्री चैरड़िया ने कभी भी क्षेत्र में पलटकर नहीं देखा, जबकि कांग्रेस सांसद ने क्षेत्र में कई स्थानों के दौरे किए और श्री चैरड़िया निष्क्रिय बने रहे। ऐसे में उनके टिकिट को लेकर भी चर्चा का बाजार गर्म है कि यदि टिकिट मिल जाए तो जीत का संदेह बरकरार रहेगा। उमरावसिंह गुर्जर भी चुनावी दौड़ में है। उनका राजनीतिक वजूद कम नहीं है, लेकिन उनके साथ कार्यकर्ताओं की जो टीम रघुराजसिंह चैरड़िया को हराने के लिए लगी थी वह टीम उन्हें फिर

जिताने का प्रयास करेगी इसमें संदेह है। श्री गुर्जर की सक्रियता भी इन दिनों कम हो गई है और भाजपा के मुददे उठाने वाले यह नेता टिकिट के आस में मुख्य मुददों से बेपरवाह रहे।


-तरूण बाहेती दौड में

तरूण बाहेती का नाम युवा नेता के रूप में सामने आया है। युवक कांग्रेस लोकसभा उपाध्यक्ष होने के नाते उनका नाम टिकिट के लिए चल रहा है। युवा होने के साथ ही उनका सांसद से अच्छा तालमेल है और समय-समय पर उन्होंने भाजपा के खिलाफ मुददो को हवा दी है। पुतला दहन जैसा आयोजन उन्होंने अपने स्तर पर करने का प्रयास किया, लेकिन सूत्र बताते हैं कि कांग्रेसी उन्हें हाईट पर जाने से रोकने का प्रयास करते रहे हैं। ऐसे में यदि उनके नाम पर सहमति बनती है तो यह नया नाम विधानसभा के लिए नया होगा। 24 जुलाई को पूर्व मुख्यमंत्री व अभा कांग्रेस महासचिव दिग्विजयसिंह की जीरन में ऐतिहासिक आमसभा कराकर विरोधियों को चोका दियां 


-युवा कांग्रेस चुनाव में सक्रियता

बाहेती जिले में चल रहे युवा कांग्रेस चुनाव में सक्रिय हे ओर उनहें युवाओं का समर्थन प्राप्त है। इसलिए इनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। वर्तमान में लोकसभा युवा कांग्रेस उपाध्यक्ष है और कई आंदोलन को बखूबी अंजाम दिया।


-जाजू चाहते टिकट

एक नाम पूर्व विधायक डाॅ. सम्पतस्वरूप जाजू का है। वे खुद इस बात से इंकार नहीं करते हैं कि वे दौड़ में नहीं है, लेकिन उनके सामने उम्र आ रही है। कतिपय लोग और स्थानीय नेता उनके नाम को हवा मंे उछाल रहे हैं और बहुत हल्के में ले रहे हैं। यदि राहुल की नीति का पालन हुआ तो इसमें से तीन नाम तो बाहर हो सकते हैं और दो नाम आगे बढ़ सकते हैं।


भाजपा को चौथी बार सत्ता में आने से रोकने के लिए कांग्रेस कर्नाटक आधार पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। इससे कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को बल मिला है। चुनाव की दौड़ में कई है, लेकिन कांग्रेस प्रदेश पर राज करने की भावना से वर्तमान सांसदों को विधानसभा चुनाव लड़ाने के मूड में है। ऐसे में उज्जवल छवि की सांसद मीनाक्षी नटराजन का नाम नीमच विधानसभा के लिए प्रस्तावित है। ऐसे में सभी कांग्रेस नतमस्तक होकर एकजुट होकर उनके लिए कार्य कर सकते हैं और भाजपा पर भारी संकट आ सकता है। भाजपा में भी ऐसे प्रत्याशियों की सूची कम नहीं है। तीसरी बार सत्ता का स्वाद चखने की लालसा सबसे बलवती हो रही है। इसमें पहला नाम स्वर्गीय शिवजी के पुत्र सज्जनसिंह का है। उन्होंने बैंक से त्याग पत्र इसी भावना के चलते दिया है। उन्होंने शिवजी के जीवित रहने के दौरान ही अपनी फिल्डिंग प्रारंभ कर दी थी। यही कारण है कि षिवाजी लोगों से कम मिलते थे और सज्जनसिंह ज्यादा। उनके नाम को लेकर भावनात्मक आधार हो सकता है, लेकिन उनकी छवि को लेकर भाजपा और संगठन कोई रूचि नहीं ले रहा है। मुख्यमंत्री ने शिवजी के नाम पर ट्रोमा सेंटर बनाने का जो निर्णय लिया और उसका नाम शिवजी के नाम पर रखने की घोषणा की उससे भी उनके नाम को बल मिलता है। दूसरा नाम मंडी व्यापारी संघ अध्यख राकेष भारद्वाज का है। वे लंबे समय से इस बात के लिए प्रयासरत है। मंडी अध्यक्ष रहने के दौरान कुछ समय के लिए उनसे गुटबाजी जरूर रही, लेकिन हाल ही में उनके द्वारा ली गई बैठक से व्यापारी काफी खुश है। भाजपा में उनके गंभीर स्वभाव और हैसियत का आंकलन अभी ठीक ढंग से नहीं किया गया है, लेकिन यह तय है कि दूसरे गुट के हावी होने के बाद भी वे प्रयासरत है और टिकिट के दावेदार भी है। पूर्व विधायक दिलीपसिंह का नाम भी इस दौरान लिया जा रहा है, लेकिन उनके पास उज्जैन की जिम्मेदार आ गई है। ऐसे में उन्होंने अपने प्रयास तो जारी रखे हैं, लेकिन सत्ता और संगठन उनके नाम पर कितना मेहरबान होगा यह टिकिट वितरण के बाद पता चलेगा। जिलाध्यक्ष रहने के दौरान चाहे उनका संपर्क अच्छा रहा हो, लेकिन विधायक रहने के दौरान उनकी कोई खास उपलब्धी नहीं है। नपा उपाध्यक्ष महेंद्र भटनागर चाहते हैं कि उन्हें विधायक का टिकिट मिले, लेकिन वे एक ऐसे ग्रुप से जुड़े हैं जो सेवाभावी कम व्यापारी ज्यादा रहा है। अब तो वे जिलाध्यक्ष मंगल पटवा के निकट है, लेकिन पटवा की छवि का भाजपा को लाभ मिलने की गुंजाईष नहीं है। श्री भटनागर का मंडी चुनाव और नपा में जो रवैया रहा है उससे संगठन भी नाराज है। उनके खाते मंे कोई बड़ी उपलब्धी भी नहीं है। ऐसे में यदि उनके नाम का विचार हुआ तो संभावना है कि पहली सूचीतक उनका नाम सिमट जाएगा। 


पटवा को नीमच में उतरने की तैयारी 

नीमच जिले में सुंदरलाल पटवा का दबदबा रहा है। जब वे मुख्यमंत्री थे तब उनके अनुज सम्पतलाल पटवा भी अपना रौब गांठते रहे हैं। अब दोनों भाईयों में विवाद है। विवाद में कितनी सच्चाई है यह बाद का विषय है, लेकिन इस समय चर्चा है कि सुरेंद्र पटवा को नीमच से उतारने की रणनीति बनाई गई है। मंगल पटवा को अध्यक्ष बनाने के पीछे भी यही रणनीति काम कर रही है। ऐसे में यदि सुरेंद्र पटवा को यहां से उम्मीदवार बनाया जाता है तो संगठन चाहे काम करें, लेकिन कार्यकर्ता कितना साथ देंगे यह भविष्य तय करेगा।

"To get the latest news update download tha app"