ग्राउंड रिपोर्ट: इस सीट से कांग्रेस के दो दावेदार, बीजेपी के नेताओं ने भी ठोकी ताल

नीमच। श्याम जाटव।

मनासा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा से वर्तमान विधायक सशक्त दावेदार के रूप में उभर रहे है तो कांग्रेस से पूर्व विधायक और एक पूर्व मंत्री भी दावेदारी के लिए ताल ठोक रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस को लंबे समय तक स्थानीय स्तर पर कोई नेता नजर नहीं आया। यह स्थानीय नेताओं की उपेक्षा माने या फिर नेताओं की कमी। 

विधानसभा चुनाव की निकटता और सत्ता में आने की लालसा नवागत और पुराने नेताओं पर इस कदर हावी हो रही है कि किसी भी प्रकार के जोड़तोड़ के साथ ही बागी या निर्दलीय चुनाव में कूदने से भी परहेज नहीं किया जा रहा है। मनासा में इस बार फिर कांग्रेस -भाजपा में सीधी टक्कर होगी।


-मालाहेड़ा के लिए कठिन है डगर 

कांग्रेस के विजेंद्रसिंह मालाहेड़ा एक बार विधायक बनने के बाद एक बार फिर चुनाव के लिए तैयार है और पार्टी भी विजेता को चुनाव मैदान में उतारने का संकेत दे चुकी है। इस बार मालाहेड़ा के लिए कठिन डगर है। ऐसे में मंगेश संघई और पूर्व मंत्री नरेंद्र नाहटा भी टिकट की दौड़ में शामिल हो गए हैं और यही कारण है कि यह नेता पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन के छोटे-छोटे कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। हालांकि पार्टी के प्रति उनकी सक्रियता और मौजूदगी से वरिष्ठ कांग्रेसी इत्तफाक रख रहे हैं।

-चावला की सक्रियता कम नहीं 

भाजपा के लिए यह सीट 2003 में कैलाश चावला के खाते में गई थी और उन्होंने कांग्रेस के पूर्व मंत्री नरेंद्र नाहटा को 25 हजार 357 वोटो से हराया था। 2008 में कांग्रेस के मालाहेड़ा से पराजित होने के बाद क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहे और 2013 में फिर से चावला विधायक बने। 2018 में बाहरी उम्मीदवार को लेकर भाजपा में विरोध नहीं हुआ तो चुनाव लड़ सकते है और इसके लिए उन्होंने पूरी तैयारी कर ली।

2003 के चुनाव की बात कि जाए तो यहां से भाजपा के कैलाश चावला ने  67193  वोट हासिल किए थे। और इसी के साथ वह विधायक चुने गए थे। दूसरे स्थान पर कांग्रेस के नरेंद्र नहाटा को 41836 वोट मिले  थे। वहीं, 2008 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के विजेंद्रसिंह मालाहेड़ा  को जीत मिली थी। उन्हें यहां से 38520 वोट मिले थे। भाजश के माधव मारू को हराया था। इस चुनाव में बीजेपी को भी शिकस्त का सामना करना पड़ा था। यहां से कैलाश चावला को हार का मुंह देखना पड़ा था। उन्हें 33124  वोट मिले थे। 2008 के चुनाव में भाजश के उम्मीदवार ने बीजेपी के वोट काट दिए थे। इसलिए बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था। 

भरपूर विकास हुआ

मनासा विधायक कैलाश चावला का कहना है कि इस क्षेत्र को सड़क, बिजली, शिक्षा जैसी बेहतर सुविधाएं मिली है।कांग्रेस शासन से ज्यादा विकास हमारी सरकार में हुआ है। विकास कार्यो की फेहरिस्त लंबी है।

कोई सौगात नहीं दी

वहीं मनासा के पूर्व विधायक विजेंद्रसिंह मालाहेड़ा ने कहा कि प्रदेश और केंद्र में भाजपा सरकार होने के बाद भी क्षेत्र को कोई सौगात नहीं मिली। मेरे कार्यकाल में बनी हुई बारहमासी सड़कों को अपनी बताकर लोकार्पण कर दिया। भाजपा ने लोगों को गुमराह किया है।

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