जुगल किशोर मंदिर के पुराने बर्तनों की हुई नीलामी, ताम्बा, पीतल-कांसा के 307 किग्रा बर्तन हुये नीलाम

पन्ना|  समूचे बुन्देलखण्ड क्षेत्र में जन आस्था के केन्द्र पन्ना के श्री जुगल किशोर मन्दिर में पहली बार प्रशासन द्वारा मन्दिर समिति के सदस्यों की मौजूदगी में पुराने बर्तनों की नीलामी कराई जा रही है। नीलामी के पहले दिन शुक्रवार को ताँबा, पीतल और कांसा के 307 किग्रा वजन के पुराने और अनुपयोगी बर्तनों को नीलाम किया गया। इस नीलामी में सतना, छतरपुर और नागौद के व्यापारियों ने भाग लिया। लेकिन पन्ना के दो युवकों ने उच्चतम बोली लगाकर 1 लाख 5 हजार 614 रू. में इन पुराने बर्तनों को खरीद लिया।

उल्लेखनीय है कि मन्दिरों के शहर पन्ना में श्री जुगल किशोर मन्दिर का अलग ही महत्व है। बुन्देलखण्ड वासियों की पन्ना के श्री जुगुल किशोर जी मन्दिर के प्रति अगाध श्रद्धा और आस्था है। यही वजह है कि इस मन्दिर में प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु राधा और कृष्ण के अलौकिक दर्शनों के लिये खीचें चले आते हैं। जन आस्था के केन्द्र इस मन्दिर का निर्माण तत्कालीन पन्ना नरेश महाराजा हिन्दूपत द्वारा कराया गया था। इस मन्दिर को बुन्देलखण्ड का वृन्दावन भी कहा जाता है, जहां प्रत्येक अमावस्या को समूचे बुन्देलखण्ड सहित दूर-दूर से हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिये आते हैं। ऐसी मान्यता है कि अमावस्या के दिन श्रद्धालु प्रेम और आस्था में डूबकर जो भी मनोकामना करते हैं, वह जरूर पूरी होती है। बुन्देलखण्ड क्षेत्र के लोग तीर्थ यात्रा करने के बाद जब वापस लौटते हैं तो जुगल किशोर जी के दरबार में हाजिरी जरूर देते हैं, ताकि तीर्थ यात्रा का पुण्य लाभ उन्हें मिल सके। इस अनूठे मन्दिर के संबंध में यह भी कहा जाता है कि जब मन्दिर में श्री कृष्ण और राधा जी की अलौकिक मूर्ति प्रतिष्ठित कराई गई तो कृष्ण जी की मुरली में बेशकीमती हीरे जड़वाये गये थे। जिसको लेकर पन्ना सहित समूचे बुन्देलखण्ड क्षेत्र में यह भजन गाया जाता है, पन्ना के जुगुल किशोर मुरलिया में हीरे जड़े। ऐसे अनूठे और जन आस्था के केन्द्र जुगुल किशोर जी मन्दिर में पुराने बर्तनों की हुई नीलामी भी आज पूरे दिन लोगों की उत्सुकता और आकर्षण का केन्द्र रही|

दो सौ वर्षों से भी अधिक पुराने इस मन्दिर के बर्तनों की नीलामी पहली बार कराई जा रही है। नीलामी के समय मौके पर ही मौजूद तहसीलदार पन्ना बबिता राठौर ने जानकारी देते  बताया कि पुराने और अनुपयोगी बर्तनों का स्टाक बहुत अधिक हो गया था। फलस्वरूप मन्दिर समिति के सदस्यों से चर्चा उपरान्त कलेक्टर मनोज खत्री के निर्देशन पर पुराने बर्तनों की नीलामी कराई जा रही है। श्री जुगुल किशोर जी मन्दिर से जुड़े लोगों का कहना है कि पूर्व में पुराने बर्तनों को नीलाम करने के बजाय उन्हें ढलवाकर फिर से नये बर्तन बनवाये जाते थे। इसके लिये पुराने अनुपयोगी बर्तन बकस्वाहा जिला छतरपुर भेजे जाते रहे हैं, जहां पुराने बर्तनों को गलाकर जैसे के तैसे नये बर्तन बनाये जाते थे।तहसीलदार बबिता राठौर ने बताया कि आज की नीलामी में पुराने टूटे-फूटे और अनुपयोगी हो चुके ताँबा, पीतल और कांसे के बर्तनों को रखा गया था। इन सभी बर्तनों की प्रति किग्रा के हिसाब से कीमत निर्धारित की गई थी। आपने बताया कि पीतल के बर्तन 305 से 500 रू. प्रति किग्रा, कांसा 425 से 750 रू. प्रति किग्रा तथा ताँबा के बर्तनों की कीमत 350 से 450 रू. प्रतिकिग्रा निर्धारित की गई थी। मन्दिर के पुराने एन्टिक बर्तन जो अच्छी स्थिति में हैं, उन्हें अलग कर लिया गया है। इन बर्तनों को सूचीबद्ध करके उनकी पृथक-पृथक कीमत निर्धारित की जायेगी, तदुपरान्त उनकी ऑनलाइन नीलामी होगी।


भगवान की पुरानी पोशाकें भी ले सकेंगे श्रद्धालु

श्री जुगल किशोर मन्दिर में भगवान श्री कृष्ण और राधा जी के पहनाने के लिये श्रद्धालु कीमती और खूबसूरत पोशाकें चढ़ाते हैं। यहां किशोर जी नित नई पोशाक धारण करते हैं, जाहिर है कि मन्दिर में पुरानी पोशाकों का अम्बार लग गया है, जिन्हें सहेजकर सुरक्षित रख पाना कठिन हो रहा है। ऐसी स्थिति में मन्दिर समिति व प्रशासन ने यह निर्णय लिया है कि भगवान की मन्दिर में रखी पुरानी पोशाकें श्रद्धालु न्यौछावर चढ़ाकर प्राप्त कर सकेंगे। बताया गया है कि मौजूदा समय मन्दिर में हजारों पोशाकें रखी हुई हैं, जिन्हें श्रद्धालुओं को न्यौछावार लेकर प्रदान करने से मन्दिर को अच्छी खासी आय होगी। इस राशि का उपयोग मन्दिर के सौन्दर्यीकरण व विकास के कार्यों में किया जा सकेगा।