डिजिटल इंडिया की पोल खोलती तस्वीर चार मंत्रियों वाले जिले में जान का दुश्मन बांस का पुल

रायसेन। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डिजिटल इंडिया की बात करते हैं तो वहीं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी बीजेपी पार्टी का बखान करते हुए प्रदेश में विकास का ढिंढोरा पीटते हैं लेकिन उसकी जमीनी हकीकत क्या है आज आप को एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ दिखाने जा रही है।

हम बात कर रहे हैं रायसेन जिले की जो प्रदेश के बाकी जिलों से अहम माना जाता है क्योंकि इसी रायसेन जिले से शिवराज सरकार में तीन कैबिनेट मंत्री जिनमें वन मंत्री डॉक्टर गौरीशंकर शेजवार पीडब्ल्यूडी मंत्री ठाकुर रामपाल सिंह राजपूत संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री सुरेंद्र पटवा साथ ही एक केंद्रीय विदेश मंत्री क्षेत्रीय सांसद सुषमा स्वराज इस जिले से बीजेपी सरकार के इतने बड़े चेहरे नेतृत्व कर रहे हैं जिस जिले से इतने बड़े मंत्री नेतृत्व करें उस जिले की तस्वीर विकास के मामले में एक अलग ही होना था लेकिन इधर जमीनी हकीकत कुछ और ही है जहां पर छोटे-छोटे मासूम बच्चे एक बांस के अधर पुल से जान जोखिम में डालकर निकल रहे हैं ग्रामीणों ने  बरसात के मौसम में  परेशानी का सबब बनता नाले पर कई बार पुल बनाने की मांग की लेकिन इनकी सुध ना तो जनप्रतिनिधियों ने ली और ना ही जिला प्रशासन ने मजबूरन परेशान होकर ग्रामीणों ने बांस का पुल बना डाला आलम यह है कि आज भी मासूम स्कूली बच्चों सहित ग्रामीण जान जोखिम में डालकर इस बांस के पुल से निकल रहे हैं ।

दरअसल मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से 100 किलोमीटर और रायसेन जिला मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर दूर देहगांव के पास संदूक गांव में एक नाले पर बीजेपी सरकार के नुमाइंदे पुल और पुलिया तक नहीं बना पाए ग्रामीणों ने कई बार इसकी गुहार जिला प्रशासन से लेकर क्षेत्रीय विधायक और प्रदेश सरकार में वन मंत्री डॉक्टर गौरीशंकर शेजवार से लगाई लेकिन किसी ने एक नहीं सुनी और ग्रामीणों की आज भी समस्या जस की तस बनी हुई है बरसात के मौसम में संदूक गांव एक टापू बन जाता है क्योंकि इस गांव से गुजरने वाली सड़क के बीच एक नाला आता है उस नाले पर पुल ना होने की वजह से ग्रामीणों को खासा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है पिछले चुनाव में नाले पर पुल ना होने की वजह से स्थानीय लोगों ने यह मांग की थी कि अगर पुल नहीं बनता तो हम वोट नहीं देंगे जिस पर प्रशासन ने ग्रामीणों को पुल बनाने का आश्वासन दिया था उसके बाद पिछले चुनाव में ग्रामीणों ने मतदान किया था लेकिन आज तक नाले पर पुल नहीं बन पाया अब कुछ महीनों में आगामी विधानसभा चुनाव है ग्रामीणों का फिर कहना है कि अगर पुल नहीं बनता तो फिर हम चुनाव का बहिष्कार करेंगे बांस के पुल की वजह से सरकार की किरकिरी होते देख जिला प्रशासन ने मांस के पुल को हटाने के लिए अधिकारियों को भेजा लेकिन ग्रामीणों ने कहा कि पहले पुल बनाएं उसके बाद हमारा बांस पुल हटाए तो उसके बाद अधिकारियों को वापस उल्टे पैर लौटना पड़ा

एक और तो मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की सरकार विकास का जमकर ढिंढोरा पीटती है लेकिन उसकी जमीनी हकीकत कुछ और है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भले ही अमेरिका से अच्छी मध्यप्रदेश की सड़कें बताते हो लेकिन आज भी प्रदेश की राजधानी से लगे जिले में  हालात बद से बदतर है इस सड़क पर पुल का निर्माण होने का इंतजार ग्रामीण कर रहे हैं वही छोटे-छोटे स्कूली बच्चे बांस के इस पुल पर से जान जोखिम में डालकर स्कूल जाते हैं एक बार तो बांस के इस पुल पर से निकलते वक्त एक स्कूली छात्र नदी में गिर गया था गली मत तो यह रही थी की वहां मौजूद लोगों ने उस छात्र को समय रहते पानी से बाहर निकाल लिया नहीं तो उस छात्र की जान जा सकती थी।

अब देखना होगा कि ग्रामीणों को इस बांस के पुल की समस्या से कब तक निजात मिल पाती है जिस जिले से प्रदेश सरकार में इतने कद्दावर मंत्री हो उस जिले के लोग एक छोटे से अदर पुल के लिए तरस रहे हैं और समस्या से जूझ रहे हैं इस पर सरकार और प्रशासन को गौर करना चाहिए सरकार भले ही प्रदेश में विकास का ढिंढोरा पीटती रहे लेकिन यह तस्वीर सरकार के सिस्टम पर एक तमाचा है।

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