बंदर की अंतिम यात्रा में उमड़ा गांव, रीति रिवाज से किया गया अंतिम संस्कार

राजगढ़।मनीष सोनी।

इंसान और बंदर की दोस्ती बहुत पुरानी हैं। भगवान राम और भगवान हनुमान इस दोस्ती के एक अनुपम उदाहरण हैं। लेकिन वर्तमान समय में जहां इंसान अपनी आपा धापी रूपी व्यस्त जिंदगी के चलते किसी की सहायता करने से खुद को दूर रखते हैं।  ऐसे समय मे जीरापुर तहसील के ग्राम गांव भंडावद में बंदर  की म्रत्यु  होने पर  ग्रामीणो द्वारा म्रत बंदर  उसका अंतिम संस्कार इंसानों की तरह कर इंसान और बंदर की दोस्ती की मिसाल कायम की हे ।

यह जानकर हर कोई आश्चर्य करता हैं। इस गांव में कुछ दिनों पूर्व एक बंदर आया था जो कुछ ही दिनों में गांव वालों का चहेता बन गया।लेकिन बंदर की एक हादसे में मौत हो गई। आजाद हिन्द फौज समिति द्वारा बन्दर का अंतिम संस्कार किया गया सुबह जीरापुर रोड पर पाया गया मृत बन्दर को आजाद हिन्द फौज के सदस्यों द्वारा उठाकर गांव में लाया गया फिर उसका हिन्दू रिवाज द्वारा बंदर के शव की अंतिम यात्रा गाजे बाजे के साथ निकाल कर  उसका दाह संस्कार किया गया जिसमे समिति सदस्य के साथ साथ गांव के युवा एवं  गांव के बुजुर्ग लोग भी शामिल थे ग्रामीणों ने इस सराहनीय काम की प्रशंसा की शमशान में गांव के बुजुर्ग गुलाब सिंह किरार ने बताया की हम जेसे हमारे बुजुर्गो का कार्यक्रम करते आये हे वेसे ही इसका भी आत्मशांति के लिये भंडारे का आयोजन किया जायेगा और अस्थि विसर्जन भी पूर्ण रीति रिवाज से किया जयेगा । 

इस अवसर पर ग्राम के भूपेंद्र किरार बजरंग भिलाला कमल शर्मा गुलाबसिंह किरार निहालसिंह किरार सांवल सोनगरा लोकेश किरार अजबसिंह किरार राकेश राठौर सहित ग्रामीण जन अंतिम यात्रा मे शामिल रहे ।