नवरात्रि विशेष : इस बार अष्टमी-नवमी साथ, ऐसे करे पूजा, मिलेगा मनचाहा फल

धर्म डेस्क

इस बार अष्टमी और नवमी साथ होने के साथ  नवरात्री आठ दिनों की है। आज सप्तमी है और कल यानि रविवार को अष्टमी और नवमी साथ होगी। अष्टमी का दिन गौरी का होता है। सालों बाद ऐसा योग हुआ है कि अष्टमी और नवमी एक साथ हुई है। पहली बार ऐसा हुआ है कि नवरात्री रविवार को शुरु हुई है और रविवार को ही खत्म होने जा रही है। वैसे तो अष्टमी का आज सुबह दस बजे से ही लग चुकी है, जो रविवार सुबह आठ बजे तक रहेगी, लेकिन बहुत से लोग कल ही अष्टमी रखेंगें और पूजा भी कल ही करेंगें। जिन जातको की 24 तारीख को कन्या पूजन करने की इच्छा हो वह 10 बजे के बाद करें। 25 मार्च रविवार की तिथि पर अष्टमी-नवमी पर सूर्योदय होगा। अत: इस दिन कंजक पूजन करना शुभ रहेगा। चारों और नवरात्री की धूम मची हुई है। जगह-जगह पांडाल लगाए गए है। प्रसाद वितरण किया जा रहा है। कहीं कहीं आज भंडारा रखा गया है तो कहीं रविवार को रखा गया है। लेकिन व्रत तो रविवार की शाम को ही खोला जाएगा।


नौ दिनो में नौ देवियों का वास

नवरात्रि के पहले दिन शैलपुत्री, दूसरे दिन ब्रह्मचारिणीकी, तीसरे दिन चंद्रघंटा माता , चौथे दिन कूष्माण्डा माता, पांचवे दिन स्कंदमाता , छठवें दिन कात्यायनी, सातवें दिन कालरात्रि, आठवें दिन महागौरी और नौवें दिन सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इसी के साथ नौवें दिन भगवान राम को भी पूजा जाता है। कहते है जो इन नौ दिनों में तन और मन से मां की सेवा-भाव करता है उस पर मां की विशेष कृपा होती है। 

इस बार की नवरात्री अलग

आज शनिवार को चैत्र नवरात्रि की महाष्टमी है। सप्तमी और अष्टमी आज एक ही दिन है साथ ही द्विपुष्कर योग भी है। सैकड़ों साल बाद ग्रह -नक्षत्रों का अद्भुत संयोग बन गया है। शनिवार और बुध का सुबह मृगशिरा नक्षत्र है। महाअष्टमी मां गौरी का दिन है, जो कि महागौरी की उपासना का विधान है।इस दिन पूजा-पाठ औऱ माता का ध्यान करने से सारे कष्ट दूर हो जाते है, धन-धान्य औऱ वैभव यश की प्राप्ति होती है। वही नवमी को मां के सिद्धिरूप की पूजा होती है। मां दुर्गे के इसी रूप को शतावरी और नारायणी भी कहते हैं। 

कन्या-भोज

कहते है मां को प्रसन्न करना है तो कन्या को भोजन कराना चाहिए। इन नौ दिनों में कन्या भोज का विशेष महत्व होता है। कन्याओं में मां का वास होता है, जो भोजन करने पर प्रसन्न होती है और हमारी मूराद पूरी करती है। नौ कन्याओं में नौ देवी का वास होता है, जो धन, बुद्धि और कष्टों का निवारण करती है। कन्याओं को मनभावन भोग लगाकर भेंट के रुप में वस्र,पैसे या फिर फल आदि दिया जाना अति शुभ माना जाता है।

इन बातों का रखें खास ध्यान

व्रत के दौरान अन्न ग्रहण करना वर्जित है लेकिन केवल फलाहार कर सकते हैं। महाष्टमी व्रत की अवधि में दाढ़ी, नाखून और बाल काटना बिल्कुल निषेध माना गया है। इसलिए इन कामों को करने से बचना चाहिए। इसके अलावा महा अष्टमी-व्रत के दौरान लहसुन-प्याज का भोजन ना बनाएं। हालांकि ऐसी मान्यता है कि शक्ति स्वरूपा माँ भक्तों को व्रत में सफल होने की शक्ति प्रदान करती हैं।

राम ने भी किए थे दर्शन

बताया जाता है कि सीता हरण के बाद जब राम लंका की चढ़ाई करने वाले थे , तब उन्होंने गौरी का ध्यान किया था, देवी ने वरदान के रुप में विजयी का आर्शीवाद दिया था।

कैसे करें महागौरी की पूजा

- महागौरी की पूजा पीले कपड़े पहनकर करें।

- मां के सामने दीपक जलाएं और उनका ध्यान करें।

- फिर मां को सफेद या पीले फूल चढ़ाएं और उनके मंत्रों का जाप करें।

- मध्य रात्रि में इनकी पूजा की जाए तो परिणाम ज्यादा शुभ होंगे।

- अष्टमी के दिन मां को नारियल का भोग लगाएं।

- नारियल को सिर से घुमाकर बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें।

- मान्यता है कि ऐसा करने से आपकी मनोकामना पूर्ण होगी।

महागौरी के मंत्र

1- श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः।

महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।

2- या देवी सर्वभू‍तेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।