दूसरे की जमीन, सांसद ने किसानों को बांट दी भू-अधिकार पुस्तिका

भोपाल/सतना। भाजपा सांसद गणेश सिंह पर टोंस जल विद्युत परियोजना की जमीन को किसानों को देने का आरोप लगा है। गणेश सिंह ने पट्टा वितरण कार्यक्रम में एक दर्जन किसानों को जमीन की भू अधिकार पुस्तिका का वितरण किया था, लेकिन वह जमीन टोंस जल परियोजना के नाम पर दर्ज है। इसको लेकर भाजपा सांसद के खिलाफ सतना में टमस कछार संघर्ष समिति धरना प्रदर्शन कर रही है। कांग्रेस नेता कमलेन्द्र सिंह की अगुवाई में किसान पिछले सात दिनों से लगातार अनशन पर हैं। आरोप है कि पीडि़त किसानों से मिलने के लिए कोई भी प्रशासनिक नुमाइंदा उनके बीच नहीं पहुंचा।

जानकारी के अनुसार सांसद गणेश सिंह ने पिछले हफ्ते जिला पंचायत अध्यक्ष सुधा सिंह, जिला पंचायत सदस्य उमेश प्रताप सिंह लाला, व रामपुर ब्लॉक के प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में टोंस जल विद्युत परियोजना के प्रभावित किसानों भू-अधिकार पुस्तिका का वितरण किया था। इस दौरान सासंद ने दावा किया कि परियोजना के लिए अनुपयोगी व डूब से बाहर अधिग्रहित जमीन सरकार किसानों को वापस दे रही है। उस समय किसान फूले नहीं समा रहे थे, लेकिन जब उनके हाथ में भू अधिकार पुस्तिका आई तो वे दंग रह गए, क्योंकि पुस्तक पूरी तरह से सही नहीं थी न हीं पुस्तक का खसरों से मिलान हो पा रहा था। खसरे में भूस्वामी के तौर पर अभी भी टोंस जल विद्युत परियोजना दर्ज है। इस मामले में सांसद की जमकर निंदा हो रही है। उनके राजनीतिक विरोधी क्षेत्र में सक्रिय हो गए हैं और किसानों को साथ लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। 


राजनीतिक फायदा लेने की कोशिश में सांसद

दरअसल जिस क्षेत्र में सांसद में किसानों को पुस्तक का वितरण किया था, वह मंत्री हर्ष सिंह के चुनाव क्षेत्र में आता है। स्थानीय राजनीतिक समीकरण इस तरह बन रहे हैं कि सांसद राज्यमंत्री के गढ़ में सेंध लगाने की तैयारी में है। सांसद गणेश सिंह लम्बे अर्से से रामपुर बाघेलान क्षेत्र को अपना राजनैतिक गढ़ बनाने का प्रयास करते रहे हंै। सांसद के भाई व मौजूदा जिला पंचायत सदस्य उमेश प्रताप सिंह लाला यहॉ से विधानसभा चुनाव लडऩा चाहते हैं। हालांकि सांसद के खिलाफ राजनीतिक साजिश की जा रही है। क्योंकि उनके विरोधी किसानों के बीच फर्जी पट्टा बताकर दुष्प्रचार कर रहे हैं, जबकि वह भू अधिकार पुस्तिका है। इस पूरे प्रकरण में तकनीकी समस्या यह है कि टोंस जल परियोजना में डूब क्षेत्र से बाहर की जमीन का मालिकाना हक किसानों को दे दिया है, लेकिन तहसीलदार कार्यालय से अभी कंप्यूटर में मालिकाना हक किसानों के नाम दर्ज नहीं हुआ है। 


सांसद के हाथों किसानों को पट्टे नहीं बंटवाएं। जो जमीन परियोजना से डूब क्षेत्र से बाहर थी। उसे किसानों को लौटाया है। उस जमीन की भू अधिकार पुस्तिका किसानों को बांटी गई थी। जो लोग इस मामले को फर्जी पट्टा वितरण बताकर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं, वे फर्जी हो सकते हैं। सांसद ने जो वितरण किया था, वह पूरी तरह से सही है।

मुकेश शुक्ला, कलेक्टर, सतना