सीहोर अस्पताल ट्रामा सेंटर : गरीबों को मिल जाए उपचार तो बन जाए बात

सीहोर। अनुराग शर्मा| जिला अस्पताल के सामने बैठा युवक आशीष आज अकेला नही है, उसकी आवाज को मिली सच्चाई की ताकत ने उसे भारी जन समर्थन दिला दिया है, वो खुद के लिए नही गरीबों के हक जे लड़ाई लड़ रहा है यही सुखद वजह है कि लोग आशीष के आंदोलन के साथ लगातार जुड़ रहे है।

"जिला अस्पताल ट्रामा सेंटर में मरीजो की अपेक्षा और इलाज में लापरवाही का क्रम इतना बढ़ चुका है और लोग इतना परेशान हो चुके हैं कि जब आशीष गहलोत में उन्हें उम्मीद की किरण दिखाई दी तो वे उनके पीछे एकजुट हो गए, आम जनता जिला अस्पताल ट्रामा सेंटर में होने वाली लापरवाही से त्रस्त है और लोग मानते हैं कि सरकार और प्रशासन इससे निपटने के लिए कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। यही कारण है कि आशीष के आंदोलन को भारी जनसमर्थन मिल रहा है"

अनशन का सर्वाधिक प्रयोग महात्मा गांधी ने किया और उसके बाद तो अनशन के रूप में आंदोलनकारियों को एक ऐसा हथियार मिल गया जिसके जरिये वे व्यवस्था को झुका कर अक्सर अपनी मांगें मनवाने लगे, और ऐसे आंदोलन उस समय तो।हुए ही लेकिन आज भी जब लोगो के हित की अनदेखी होती है तो अनशन का मार्ग सभी पर असर डालता है। अनेक लोगो का मानना है कि कई बार चुनाव जीतने के बाद सरकार अहंकार में चूर हैं, कई वर्ष से जमा स्टाफ, कुछ डॉक्टरों के निजी हित के कारण वह लोगों की भावनाओं को नहीं समझना चाहती। "जनता के लिए राजनीतिक वर्ग की जवाबदेही बनती है लेकिन कई बार जीतने के बाद वह खुद को जिम्मेदारी से मुक्त समझ रही है और गरीब वर्ग के साथ मनचाहे फैसले करता है, इससे जनता में रोष पनपा है और आशीष इसी रोष को प्रकट कर रहे हैं. "

लोगो के मुताबिक राज्य सरकार को समझना चाहिए कि इस तरह के अनशन, प्रदर्शनों और सड़क पर उतरने की नौबत क्यों पड़ी. नौकरशाहों ने भ्रष्टाचार को काबू में करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया और इस वजह से लोगों सड़कों पर उतरना पडा. आशीष की छवि बेदाग है और लोग स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से परेशान हैं. इन दोनों बातों की वजह से ही उन्हें अपार समर्थन मिल रहा है।

यूं तो अन्ना आशीष सीहोर में सामाजिक मुद्दों पर आंदोलन करते हुए कई बदलाव लाने में सफल रहे हैं लेकिन उन्हें असली पहचान और इतनी मान्यता अस्पताल के लिए उनके आंदोलन ने ही दी, लोगो का मानना है कि आशीष को असली ताकत लोगों से ही मिलती हैं। आशीष को अपने लोगों से ताकत मिलती है. सीहोर के युवा और हजारों कार्यकर्ताओं के अलावा कई नेता, सरकारी कर्मचारी, पुलिसकर्मियों का भी निजी रूप से मानते हैं कि वह जो कर रहे हैं वह बिलकुल सही है. किसी भी सच्चे आंदोलन को इससे ताकत मिलती है. "

आशीष के साथ लोगों के एकजुट होने की बड़ी वजह एक के बाद कई मामले अस्पताल की लापरवाही के सामने आते रहते है जैसे इलाज न कर मरीज को भोपाल रैफर करना, आदि है वही आशीष के आगे आने से एक नए आंदोलन की शुरुआत हुई।

 यह कदम भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम के सामने सरकार के पास विकल्पों की जहां कमी दिखाता है वहीं आशीष और उनके साथियों को भारी जन समर्थन का मजबूत आधार भी तैयार करता है।

गौरतलब है कि अस्पताल ट्रामा सेंटर में मरीजो को उपचार कम और दुत्कार ज्यादा मिलने के लगातार मामले सामने आते रहे हैं और कभी भी लापरवाह डॉक्टरों पर कोई कड़ी कार्यवाही नही हुई।

"To get the latest news update download tha app"