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मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में टप्पर में चल रही पाठशाला

सीहोर| शिक्षा के स्तर को बढ़ावा देने में राज्य सरकार करोड़ो रुपए खर्च कर आदिवासी अंचलों में शिक्षा के स्तर को बढ़ाने की बात कर रही है पर स्कूली बच्चों को बैठाने के लिए भवन भी नसीब नहीं हो रहे,  उन्हें टप्पर के नीचे बैठकर शिक्षा ग्रहण करनी पड़ रही है फिर इससे बड़ी विडंबना और क्या हो सकती है यदि ऐसे हालात मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विधानसभा क्षेत्र में ही है तो फिर "दिया तले अंधेरा" वाली कहावत पूरी तरह से चरितार्थ होती है।

 टप्पर में स्कूल लगने की स्थितियां उजागर हो रही है। सीहोर जिले से 65 किमी दूर सिंहपुर पठार ,नबलगाव टप्पर पर ऐसा नजारा देखने को मिला जहां स्कूली बच्चे भवन के अभाव में टप्पर में बैठकर शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर है लगभग 06 वर्षों का समय व्यतीत हो चुका है और यहां पर हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं और यहां पर सुविधाओं का अभाव भी स्पष्ट रुप से देखा जा सकता है जब नबलगाव टप्पर, सिंहपुर पठार पहुंचकर सहारा समय सवावदाता नितिन ठाकुर ने जायजा लिया  तो यहां पर भी आश्चर्य जनक स्थिति देखने को मिली जिसकी उम्मीद भी नहीं की जा सकती आखिर शिक्षा विभाग कितना लापरवाह है कि मुख्यमंत्री के क्षेत्र में ही आदिवासियों के बच्चे पढ़ाई और भवन को तरस रहे हैं। 65,65 छात्र-छात्राओं पर 2,2 शिक्षक हैं शिक्षक ने बताया स्कूल पहुंचने के लिए रोड भी नहीं है  टप्पर में बच्चों को बकरा-बकरी एवं मुर्गा-मुर्गियों के बीच बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है कभी वह अपनी किताबों में झाकते हैं तो कभी मुर्गा-मुर्गी भगाते नजर आते हैं ऐसे में नौनिहाल क्या पढ़ेंगे यह सोचने वाली बात है। 

ऐसे में बच्चे टप्पर में बैठकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं और शासकीय भवन में ग्रामीणों द्वारा कब्जा कर लिया गया है कहीं ना कहीं शिक्षा विभाग की अनदेखी के बीच यह शाला चल रही है जहां पर आदिवासी बच्चे ऐसी स्थिति में पढ़ने को मजबूर है।

 ग्राम के सरपंच जयनारायण बारेला द्वारा कई बार वरिष्ठ अधिकारिओ जिला पंचायत सीईओ विकास खंड शिक्षा अधिकारी और एसडीएम के साथ प्रदेश के मुखिया को अवगत कराने के बाद भी टप्पर में स्कूल लग रहा है यहां पहली से पाँचवी तक की कक्षाएं संचालित की जा रही है विद्यार्थियों को शासन की योजना के अंतर्गत सुविधाएं भी पूरी तरह से नहीं मिल पा रही है।

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