18 दिन में नवनियुक्त जिलाध्यक्ष का इस्तीफा, उठ रहे कई सवाल

शहडोल/भोपाल।

शहडोल से नवनियुक्त जिलाध्यक्ष सुभाष गुप्ता ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।जिसके बाद से ही कांग्रेस में हड़ंकप मच गया है। कहा जा रहा है कि लगातार अनदेखी किए जाने से नाराज गुप्ता ने इस्तीफा दिया। वही गुप्ता से जब इस बार में पूछा गया तो उन्होंने इस्तीफे की वजह निजी कारणों को बताया है।दूसरी तरफ सुभाष की जगह आजाद बहादुर सिंह को जिलाध्यक्ष व यादवेन्द्र पाण्डेय एवं महमूद खान को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने की अटकलें जोरों पर है। सुत्रों की माने तो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुभाष गुप्ता का यूं इस्तीफा देना चुनावी साल में पार्टी को भारी पड़ सकता है।

दरअसल, 22 मई को प्रदेश नेतृत्व ने जिलाध्यक्षों की सूची जारी की गई।इसके बाद से ही विवाद खड़ा हो गया था।वरिष्ठ कार्यकर्ताओं द्वारा इस सूची को लेकर आपत्ति जताई गई थी जिसकी गूंज भोपाल से दिल्ली तक पहुंची थी। जिलाध्यक्ष का शुरु से ही पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं द्वारा विरोध किया जा रहा था। इसका दूसरा मुख्य कारण ये भी है कि नगर पालिका चुनाव के दौरान सुभाष गुप्ता ने कांग्रेस का साथ छोंडक़र निर्दलीय प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार प्रसार किया था। जिसके चलते पार्टी ने उन्हे 6 वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया था जिसके लगभग 8 माह बाद अचानक उनकी ताजपोशी की घोषणा की गई, जिससे वरिष्ठ कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में आक्रोश पनपने लगा। वही विंध्य के कई कांग्रेसी नेता इस बात से भी नाराज है कि उन्हें पार्टी द्वारा चुनाव समितियों में अनदेखा किया जा रहा है। अब ऐसे में सुभाष गुप्ता के इस्तीफे ने पार्टी में हलचल पैदा कर दी है। इस्तीफे के बाद से ही कई सवाल उठने लगे है। कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं व कांग्रेस पार्षदों के विरोध को इस निर्णय का प्रमुख कारण माना जा रहा है। वही कांग्रेस की एक बार फिर अंतकलह सामने आई है।

सुत्रों की माने तो शनिवार देर शाम सुभाष गुप्ता के इस्तीफे देने के बाद  उनकी जिम्मेदारी वरिष्ठ कांग्रेस कार्यकर्ता आजाद बहादुर सिंह को सौंपी गई है। उनके साथ यादवेन्द्र पाण्डेय व महमूद खान को कार्यकारणी अध्यक्ष बनाया गया है। 

ये कहकर दिया इस्तीफा

सुभाष गुप्ता ने अपने इस्तीफे में लिखा है कि वो कांग्रेस को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे इसलिए इस्तीफा दे रहे हैं।लेकिन सोचने वाली बात ये है कि प्रदेशाध्यक्ष की कमान संभालते ही कमलनाथ ने नीरज द्विवेदी को हटाकर सुभाष गुप्ता को जिला अध्यक्ष बनाया था।सुभाष गुप्ता कमलनाथ के काफी पसंदीदा माने जाते है, इसीलिए तो पार्टी के निष्काषित किए जाने के बाद भी उन्हें भरपूरा फायदा मिला था और कमलनाथ के प्रदेशाध्यक्ष बनते ही उन्हें जिलाध्यक्ष की कमान सौंप दी गई। ऐसे में ताजपोशी के 18 दिनों के अंदर इस्तीफा देना कई सवाल खड़े कर रहा है।हालांकि उनके जिलाध्यक्ष बनते ही जिले के नेताओं ने आपत्ति उठाई थी कि निष्कासित नेता को जिला अध्यक्ष क्यों बनाया गया।इसकी शिकायत राहुल गांधी तक भी पहुंची थी, इसीलिए माना जा रहा है कि अपने विरोध और नेताओं की नाराजगी के चलते सुभाष गुप्ता ने इस्तीफा दिया है।