आस्था या अंधविश्वास : मां को प्रसन्न करने कैदी ने जीभ काटकर चढ़ाई

शहडोल।

नवरात्री का त्यौहार चल रहा है। हर कोई मां को खुश करने में लगा हुआ है। कोई व्रत करके तो कोई नंगे पैर चलकर, तो कोई बलि देकर मां को प्रसन्न कर रहा है।वही अब भी अंधविश्वास लोगों के सिर चढ़ कर बोल रहा है। ताजा मामला शहडोल का है, जहां जेल में बंद विचाराधीन कैदी ने मां को खुश करने के लिए उसके चरणों अपनी जीभ काटकर भेंट कर दी। घटना के बाद जेल प्रबंधन में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में कैदी को जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया है, जहां उसका इलाज जा रहा है।कैदी की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि कैदी अपनी की पत्नी की हत्या के मामले में जेल में बंद है और सजा काट रहा है। वही पिछले साल भी नवरात्रि के अवसर पर देवी को प्रसन्न करने के लिए जेल में बंद विचाराधीन कैदी ने अपनी जीभ काटी थी।

दरअसल, बुधवार को पत्नी की हत्या में जेल में बंद कैदी सूर्यकांत ने जेल के अंदर बने देवी मंदिर में अपनी जीभ काटकर चढ़ा दी।कैदी के ऐसा करते ही बाकियों कैदियों में हडकंप मच गया । किसी ने इसकी सूचना जेल प्रबंधन को दी। जीभ काटने के बाद सूर्यकांत के मुंह से खून बहता रहा, इसके बाद तत्काल ही कैदी को जिला जेल में भर्ती करवाया गया। उपचार के बाद घायल कैदी को वापस जेल में ले जाया गया है। कैदी की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। हालांकि इस मामले में अभी तक जेल प्रबंधन की तरफ से कोई बयान नही दिया गया है, वह इस मामले में जवाब देने से बच रहा हैं। मामला दर्ज कर जांच शुरु कर दी गई है।

बता दे कि नवरात्री में देवी मंदिर में अक्सर भक्त अपनी मान्यताओं को लेकर जीभ काटकर चढ़ाते रहे है। लोगों को मानना रहता है कि देवी को जीभ चढ़ाने से उनकी इच्छाएं पूरी होती है। भक्तों की इस अंधी आस्था या यूं कहें कि जुनून के आगे सब बेबस नजर आते हैं।ऐसी घटनाओं को तो देखकर यहीं लगता है कि हम भले ही 21वीं सदी में प्रवेश कर चुके हो लेकिन आज भी लोगों में अंधविश्वास एवं सामाजिक कुरीतियां जड़ जमाए हुए हैं।