MP : पति की मौत के बाद मजदूरी करने गई महिला तो पंचायत ने सुनाया ये तुगलकी फरमान

श्योपुर

देश भले की कितना आगे बढ़ जाए लेकिन छोटे-छोटे गांवो में पंचायतों के अजीबोगरीब फरमान आज भी सुनाए जाते है।जिन्हें वहां रहने वाले व्यक्ति को मानना ही पड़ता है , अगर वो विरोध करता है तो पंचायत उसे या तो गांव से बाहर निकलने का आदेश सुना देती है, या फिर उस पर जुर्माना लगा देती है। ताजा मामला मध्यप्रदेश के श्योपुर से सामने आय़ा है। जहां एक महिला के पति की मौत हो जाने के बाद वह बच्चों का पेट भरने के लिए मजदूरी करने के लिए घर से बाहर निकली तो पंचायत ने 5 हजार का जुर्माना ठोक दिया।इसके बाद महिला ने गांव छोड़ दिया । अब वह कभी अस्पताल, कभी बस स्टैण्ड तो कभी रेलवे स्टेशन पर रह कर जिंदगी गुजार रही है। मामला कराहल ब्लॉक के भेला भीमलत गांव का है।

बता दे कि आदिवासी समाज ने महिलाओं को अकेले मजदूरी पर जाने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। प्रतिबंध के बाद भी कोई महिला ऐसा करती है तो उस पर पंचायत बैठाकर जुर्माना लगाया जाता है।। 6 मार्च को भेला भीमलत में आदिवासी पंचायत हुई। जिसमें विधवा महिलाओं को अकेले काम पर न जाने का फरमान सुनाया और जुर्माने का प्रावधान रख दिया।इसी के तहत यह जुर्माना लगाया गया।

जानकारी के अनुसार, भेला-भीमलत गांव की फूलो आदिवासी के पति की मौत ढाई महीने पहले हो चुकी है। फूलो के दो बच्चे हैं जिनका भरण-पोषण करने के लिए वह सात दिन पहले मजदूरी करने चली गई थी। यह बात जब समाज के पुरुषों को पता लगी तो तत्काल भेला-भीमलत गांव में समाज की पंचायत हुई। बकौल फूलो तीन दिन पहले उस पर पंचायत ने 5000 का जुर्माना कर दिया। उसकी आर्थिक हालत ऐसी न थी कि, 5000 का जुुर्माना अदा कर पाती इसलिए, रात में बच्चों को लेकर गांव छोड़कर शहर आ गई। बताया गया है कि, बुधवार की दोपहर तक फूलो श्योपुर में थी उसके बाद वह मजदूरी के लिए राजस्थान के सवाई माधौपुर की ओर चली गई है।सबसे शर्मनाक तो यह है कि मामले की जांच व महिला की मदद करने के बजाय कलेक्टर पन्नालाल सोलंकी ने इस मामले में आधिकारिक तौर पर कुछ भी कहने से मना कर दिया।