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संतों को राज्यमंत्री का दर्जा देने पर क्या बोले शिवराज...देखिये वीडियो

भोपाल/टीकमगढ़ | चुनावी साल में मप्र सरकार हर वर्ग को खुश करने की जुगत में है, ताकि इसका फायदा उन्हें चुनाव के समय मिले| इसी क्रम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कर्मचारी, किसान के बाद साधू संतो को भी तोहफा दिया है और प्रदेश के पांच संतों को राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया है| सरकार के इस फैसले को लेकर कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं| इन संतों में वो भी शामिल हैं जो अभी कुछ दिनों पहले तक सरकार के खिलाफ थे और सीएम की नर्मदा यात्रा में हुए भ्रष्टाचार की पोल खोलने के दावे कर रहे थे और प्रदेश भर में एक रथ यात्रा के माध्यम से सरकार की मुश्किलें बढ़ाने वाले थे| लेकिन सरकार ने पहले ही अपनी चाल चल दी और ऐसे संतों के आक्रोश को थामने के लिए उन्हें एक बड़ी सौगात सीएम ने दे दी| वहीं जब मुख्यमंत्री से पुछा गया कि आखिर साधु संतो को राज्यमंत्री का दर्जा देने की क्या जरुरत पड़ गई तो मुख्यमंत्री एक दम से कोई सटीक जवाब नहीं दे पाए| इस दौरान सीएम सिर्फ इतना ही कह सके कि समाज के हर वर्ग को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है| 

दरअसल, मुख्यमंत्री ने कंप्यूटर बाबा से मिलकर उनके सामने ही राज्यमंत्री का दर्जा प्रदान करने की घोषणा की है | इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग ने 3 अप्रैल को आदेश भी जारी कर दिया। जिसके तहत सरकार ने नर्मदा किनारे वृक्षारोपण, जल संरक्षण तथा स्वच्छता के लिए जन जागरूकता का अभियान चलाने के लिए विशेष समिति गठित की है। जिसमें कंप्यूटर बाबा को सदस्य बनाया है। समिति में कंप्यूटर बाबा के अलावा नर्मदानंद महाराज, हरिहरानंद महाराज, भैय्यूजी महाराज एवं पंडित योगेन्द्र महंत को भी सदस्य बनाया है।

सरकार के इस फैसले को लेकर सियासत गरमाई हुई है| अब तक संतों को सरकार धार्मिक यात्राओं में बुलाकर उनका सम्मान करती थी, लेकिन यह पहली बार है जब साधु संतों को राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया है| जबकि वीआईपी ट्रीटमेंट का खुद संतों ने विरोध किया है| टीकमगढ़ पहुंचे मुख्यमंत्री से जब इस सम्बन्ध में मीडिया ने बातचीत की तो सीएम ने कहा कि समाज का हर वर्ग विकास के और जनकल्याण के कामों में जुड़े, इसलिए समाज के हर वर्ग को जोड़ने का प्रयास सरकार द्वारा किया जा रहा है| 


कंप्यूटर बाबा का यू टर्न 

आपको बता दें सरकार जिन संतों को राज्यमंत्री का दर्जा दिया है उनमे शामिल कंप्यूटर बाबा शिवराज सरकार द्वारा नर्मदा बचाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर निकाली गई यात्रा और नर्मदा किनारे कराए गए वृक्षारोपण की पोल खोलने के लिए अभियान चलाने की तैयारी कर चुके थे। कंप्यूटर बाबा ने सरकार को नर्मदा यात्रा एवं वृक्षारोपण का फर्जीवाड़ा उजागर करने की चेतावनी भी दी थी। इसके लिए कंप्यूटर बाबा दिल्ली में सर्वसुविधायुक्त रथ बनाने का आॅर्डर भी दे चुके थे। वे इंदौर से यात्रा शुरू करने वाले थे, जिसके जरिए वे नर्मदा किनारे के जिलों एवं नगरों में जाकर शिवराज सरकार की पोल खोलते।  बाबा 1 अप्रैल से 15 मई तक प्रदेश के अलग-अलग जिलों में जाकर शिवराज सरकार की पोल खोलते। इससे पहले ही सरकार ने कंप्यूटर बाबा को राज्यमंत्री का दर्जा देकर खुश कर दिया| इतना ही नहीं इस नर्मदा घोटाला रथ यात्रा में कंप्यूटर बाबा के साथ सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले यात्रा के संयोजक पं. योगेंद्र महंत को भी सरकार ने खुश कर दिया| जबकि दोनों ही संतों ने समस्त संत समाज को लेकर सरकार के भ्रष्टाचार को उजागर करने का संकल्प लिया था, लेकिन अचानक सरकार से मिल रहे लाभ के लिए इन्होने पलटी मार दी| जिससे संत समाज में भी इसको लेकर आक्रोश बढ़ रहा है| वहीं सरकार के इस फैसले को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं| 


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