इलाहाबाद अब कहलायेगा 'प्रयागराज', योगी 'राज' में बदल गया नाम

लखनऊ

देश में शहरों के नाम बदलने का सिलसिला जारी है। एक बार फिर देश के एक शहर का नाम बदला गया है।इसी कडी में 444 साल बाद इलाहाबाद का नाम बदल दिया गया है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज करने के एक प्रस्ताव को मंगलवार को मंजूरी दे दी। हालांकि कांग्रेस ने इलाहाबाद का नाम बदलने का विरोध किया है। हालांकि योगी कैबिनेट के इस फैसले के बाद साधु-संतों में ख़ुशी का माहौल है। 

        दरअसल,  इससे पहले पिछले साल अक्टूबर मे योगी सरकार ने मुगलशराय रेलेव स्टेशन का नाम बदलकर दीन दयाल उपाध्याय (डीडीयू) स्टेशन कर दिया था। योगी सरकार के इस पहल का भी विपक्ष ने विरोध किया था। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा था कि 2019 में आयोजित होने वाले कुंभ मेला से पहले शहर का नाम बदलकर प्रयागराज करने का एक प्रस्ताव है। पौराणिक और धार्मिक महत्व को देखते हुए वर्षों से इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने की मांग उठती आ रही थी। मगर किभी इस पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया। जब मार्च 2017 को योगी सरकार उत्तर प्रदेश में आई तो उन्होंने यह वादा भी किया कि वे इलाहाबाद प्रयागराज कर देंगे। इसके बाद कई संतों ने उन्हें उनके वादे को याद दियाला। इलाहाबाद में मुख्यमंत्री ने इस घोषणा को अमली जामा पहनाने की शुरुआत कर दी।

अगले साल प्रयागराज में अर्द्ध कुंभ लगने जा रहा है और धार्मिक दृष्टि से भी इसके मायने अहम हैं। यह अर्द्ध कुंभ अगले साल जनवरी में लगेगा। दुनिया के प्राचीनतम शहरों में से एक इस शहर का नाम मूल रूप से प्रयाग ही था। इसका जिक्र ऋगवेद में भी मिलता है। पुराणों में इलाहाबाद का नाम प्रयागराज ही था, लेकिन अकबर के शासनकाल में इसे बदलकर इलाहाबाद कर दिया गया था। इतिहासकार बताते हैं कि अकबरनामा और आईने अकबरी व अन्य मुगलकालीन ऐतिहासिक पुस्तकों से ज्ञात होता है कि अकबर ने सन 1574 के आसपास प्रयागराज में किले की नींव रखी थी।इलाहाबाद का नाम बदले जाने को लेकर संगम तट पर भी लोगों में उत्साह का माहौल है। संगम पर आने वाले श्रद्धालुओं से लेकर तीर्थ पुरोहित समाज और प्रयागवाल सभा ने सीएम योगी के इस फैसला का स्वागत किया है।