कोर्ट में केस, रावण तो महाज्ञानी थे, दहन पर लगे रोक

भोपाल। रावण महाज्ञानी थे, उन्हें बुराई का प्रतीक बताकर सदियों से हर साल दशहरे पर उनका पुतला दहन किया जा रहा है। इससे न सिर्फ वायु प्रदूषण होता है, बल्कि ब्राह्मण समाज का अपमान भी हो रहा है। रावण दहन पर रोक लगाई जाए। इस संबंध में इंदौर में जिला कोर्ट में एक याचिका दायर हुई है। दशहरे से पहले एक बार फिर रावण दहन पर रोक लगाने की मांग उठी है, इससे पहले भी कई बार विरोध देखा जा चुका है| 

कोर्ट में दायर याचिका में धर्मेंद्र शुक्ला, प्रहलाद शर्मा ने कहा है कि रावण महाज्ञानी और परम शिवभक्त ब्राह्मण थे। कई लोगों के लिए वे आस्था के प्रतीक हैं। बड़ी संख्या में लोग उन्हें पूजते भी हैं। इतना बड़ा ज्ञानी होने के बावजूद उन्हें बुराई का प्रतीक बना दिया गया है। हर साल दशहरे पर उनका पुतला बनाकर दहन किया जाता है, इसे तुरंत रोका जाए। याचिका में मांग की गई है कि रावण दहन पर स्थायी रोक लगाकर दहन करने वालों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के आदेश दिए जाएं। इस मामले में 25 सितंबर को सुनवाई होगी।

सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुकी है याचिका

रावण दहन को लेकर पूर्व में दायर याचिका सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुकी है। यही वजह है कि उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर करने के बजाय जिला कोर्ट में दीवानी केस दायर किया है।  वे इस केस में मामले से जुड़े सभी दस्तावेज पेश कर सकेंगे।

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