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यहां पतियों ने वट सावित्री व्रत रख की प्रार्थना.."सात जन्मों तक न मिले ऐसी पत्नी"

अजब-गजब: पत्नी की लम्बी उम्र की कामना और सात जन्मों तक जीवनसाथी का साथ मिले इसी प्रार्थना के लिए पत्नियां वट सावित्री व्रत करती हैं, लेकिन कुछ पतियों ने एक जन्म नहीं बल्कि सातों ऐसी पत्नी न मिले इसके लिए व्रत रखा| पति के लिए पत्नियों के कई व्रत है, लेकिन ऐसा पहली बार सामने आया है जब पतियों ने पत्नियों के लिए व्रत रखा और वो भी उनसे छुटकारा पाने के लिए| यह घटना चर्चा में है,  कर्नाटक और महाराष्ट में यह अजीबोगरीब मामला सामने आया है।

पत्नी से तंग आ चुके कर्नाटक के एक शख्स ने वट सावित्री व्रत रख ये कामना की कि अगले जन्म उसे ऐसे पत्नी न मिले। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक व्रत रखने वाले व्यक्ति का नाम शशिधर रामचंद्र कोपार्डे है। शशिधर पत्नी से पीड़ित पुरुषों के लिए संतवन केंद्र भी चलाते हैं। व्रत के बारे में बताते हुए शशिधर ने बताया कि उन्होंने वट सावित्री व्रत के एक दिन पहले ही मंगलवार को पूजा की। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी ने उन पर दहेज उत्पीड़न का फर्जी मुकदमा दर्ज कराया है।  कोपार्डे ने कहा कि 'मैं अगले जन्म में ब्रह्मचारी रहना पसंद करूंगा लेकिन ऐसी पत्नी के साथ नहीं रह पाऊंगा जो मेरे परिवार के खिलाफ झूठे मुकदमें दर्ज करवाती है। उन्होंने आगे कहा 'मैंने इन तमात परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए बरगद के पेड़ की पूजा की है। और साथ ही परंपरा के अनुसार धागा भी बांधा है।

ऐसा ही एक मामला महाराष्ट्र में वट पूर्णिमा के दिन सामने आया,  जहां पुरुषों ने पत्नियों से छुटकारा पाने की दुआएं मांगी। दरअसल ये पुरुष अपनी पत्नियों से इतने परेशान हैं कि उन्होंने पेड़ के चारों तरफ उल्टी दिशा में धागा बांधकर मन्नत मांगी कि अगले सात जन्मों तक ऐसी पत्नी मत देना। संगठन के सदस्य तुषार वाखरे के अनुसार हमारी पत्नियां कानूनी प्रावधानाओं का इस्तेमाल कर हमारा उत्पीड़न करती हैं। उन्होंने इतनी दिक्कतें दी हैं कि हम उनके साथ सात सेकंड भी नहीं रहना चाहते, सात जन्म की बात ही छोड़ दीजिए। 


हिन्दू धर्म में वट पूर्णिमा का बड़ा महत्व है और यह एक ऐसा पर्व है जहां शादीशुदा महिलाएं बरगद के पेड़ के चारों तरफ धागा बांधकर अगले सात जन्मों तक अपने पति का साथ मांगती हैं। यह पर्व सावित्री और सत्यवान की कथा पर आधारित है जहां सावित्री ने मृत्यु देवता यम से अपने पति सत्यवान का जीवन ‘वापस हासिल’ कर लिया था।  यह त्योहार महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, गोवा और कर्नाटक के उत्तरी भागों में 27 जून को मनाया गया।


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