पांच सालों में कितनी बढ़ी सीएम शिवराज की संपत्ति, पढ़े यहां

भोपाल।

चौथी बार सत्ता बनाने का दावा कर रहे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को धनतेरस के दिन अपन नामांकन दाखिल कर दिया है। शिवराज सिंह चौहान ने उनके विधानसभा क्षेत्र बुदनी से नामांकन भरा। इस दौरान उनके साथ उनकी पत्नी साधना सिंह चौहान और दोनो बेटे भी मौजूद थे।इसके साथ ही मुख्यमंत्री शिवराज ने नाम निर्देशन पत्र(नामांकन का शपथ पत्र) में अपनी संपत्ति का भी खुलासा किया है। पत्र के अनुसार, पांच सालों में सीएम और उनके परिवार की आय सवा करोड़ बढ़ी है। ब्यौरा के अनुसार, उनके पास 10 करोड़ 45 लाख 82 हजार 140 रुपए है।  इसके साथ ही नामांकन पत्र के शपथ पत्र अनुसार साधना सिंह की संपत्ति शिवराज सिंह से दोगुनी है। पांच साल में उनकी संपत्ति में सवा चार करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई है। 2013 में उनके पास छ: करोड़ 27 लाख 54 हजार 114 रुपए की संपत्ति थी।


संपत्ति का ब्यौरा

नगद राशि

शिवराज सिंह चौहान : 45 हजार

साधना सिंह : 40 हजार

बैंक एकाउंट का ब्यौरा


शिवराज सिंह चौहान

एसबीआई बैंक विदिशा- आठ लाख 36 हजार 819

एसबीआई बैंक भोपाल- पांच लाख 79 हजार 423

जिला सहकारी बैंक भोपाल- छ: लाख 10 हजार 532


साधना सिंह

एसबीआई विदिशा- नौ लाख 47 हजार 374

पीएनबी भोपाल- एक लाख 72 हजार 392


वाहन

शिवराज सिंह चौहान के पास वाहन नहीं है।

साधना सिंह के नाम से डेढ़ लाख की एक एंबेसडर है।


अन्य

शिवराज सिंह चौहान

एक रिवाल्वर- 5500 रुपए

घरेलू सामान- दो लाख 50 हजार


जमीन का ब्यौरा

शिवराज सिंह चौहान : 77 लाख रुपए

उनके पास जैत में 20 एकड़, बैस में साढ़े तीन लाख और डोलखेड़ी में ढाई एकड़ भूमि है।

साधना सिंह : तीन करोड़ 32 लाख रुपए

साधना सिंह के नाम से विदिशा में 32 एकड़ जमीन है।

आवासीय

शिवराज सिंह चौहान : एक करोड़ 95 लाख 50 हजार रुपए

उनके पास विदिशा में मकान है।

साधना सिंह : तीन करोड़ 20 लाख रुपए

उनके पास अरोरा कॉलोनी में फ्लैट है।

कुल संपत्ति का ब्यौरा

शिवराज सिंह चौहान : तीन करोड़ 15 लाख 70 हजार 274 रुपए।

साधना सिंह : सात करोड़ 30 लाख 11 हजार 866 रुपए।


अबतक का शिवराज का राजनैतिक सफर

पांच मार्च 1959 को जन्मे चौहान ने अपना पहला चुनाव वर्ष 1990 में बुधनी से ही जीता था और विधायक बने थे। इसके बाद वर्ष 2006 के उपचुनाव में प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते इस सीट पर जीते थे और फिर वर्ष 2008 एवं वर्ष 2013 के चुनाव में जीत हासिल कर इस सीट का प्रतिनिधित्व किया। वह वर्ष 2005 से मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री हैं और लगातार 13 साल तक मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बनने का उन्होंने इतिहास रचा है। 

इसके अलावा, चौहान मध्यप्रदेश की विदिशा लोकसभा सीट से पांच बार लगातार सांसद भी चुने गये। वह वर्ष 1991 में हुए उपचुनाव में पहली बार विदिशा सीट से सांसद बने थे। तब यह सीट वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा खाली की गई थी, क्योंकि वाजपेयी वर्ष 1991 के आम चुनाव में विदिशा एवं लखनऊ की दो सीटों से लोकसभा चुनाव जीते थे। इसक बाद चौहान वर्ष 1996, 1998, 1999 एवं 2004 में विदिशा से सांसद बने। 


वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव में चौहान प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (कांग्रेस) के खिलाफ गुना जिले की राघौगढ़ सीट से चुनाव लड़े थे, लेकिन इन चुनावों में भाजपा को प्रदेश में प्रचंड बहुमत मिलने के बाद भी वह (चौहान) हार गये थे।    हालांकि, बाद में उमा भारती एवं बाबूलाल गौर सहित अन्य पार्टी नेताओं में मुख्यमंत्री पद के लिए भाजपा में अंदरूनी कलह हो गयी, जिसका फायदा चौहान को मिला और पार्टी ने बाबूलाल गौर को हटाकर उन्हें 29 नवंबर 2005 में मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बना दिया गया। अब चौथी बार शिवराज सरकार बनाने का दावा ठोक रहे है।अगर वे इस बार मुख्यमंत्री बनते है तो यह मध्यप्रदेश के इतिहास में लिखा जाएगा।