केरल में बाढ़ पीड़ितों के लिए बक्से उठा रहा था एक आईएएस, कोई न पहचान सका

नई दिल्ली। केरल में आई बाढ़ ने चारों और तबाही मचाई, इसके चलते लाखों लोग बेघर हो चुके हैं। वहीं बाढ़ का पानी तो उतर गया लेकिन अपने पीछे तबाह के निशान छोड़ गया है। इन सबके बीच भी मानवता के कई उदाहरण देखने को मिले, जिसने इस बड़ी तबाही से उभारने के लिए पूरी शिद्दत के साथ लोगों की मदद की है। ऐसे ही बाढ़ पीड़ितों के लिए काम करने वाले एक आईएएस अधिकारी की जमकर सरहाना की जा रही है।

स्थानीय मीडिया के अनुसार, शनिवार से एक शख्श बाढ़ से पीड़ित केरल में राहत शिविरों में काम कर रहा था, कोच्चि में ट्रक से राहत सामग्री के बक्से अपने सिरों पर ढो रहा था, लेकिन जब उसकी पहचान सामने आई तो हर कोई उस शख्श की सराहना कर रहा है। दूसरों की तरह वह भी पूरे दिन राहत कार्य में व्यस्त रहता था,  लेकिन जब एर्नाकुलम जिला कलेक्टर ने केबीपीएस प्रेस में केंद्र का दौरा किया, तो अन्य स्वयंसेवक सदमे में थे। वह आदमी जो उनके साथ बैग ढो रहा था, कन्नन गोपीनाथन एक आईएएस अफसर निकले।

केंद्रशासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली के जिला कलेक्टर के रूप में सेवा करने वाले एक 2012 बैच आईएएस अधिकारी गोपीनाथन 26 अगस्त को केरल पहुंचे थे क्योंकि राज्य घातक बाढ़ के बाद विनाश से जूझ रहा था। कोट्टायम के मूल निवासी कन्नन जलप्रलय से लड़ने में मदद करने के लिए अपनी नौकरी से छुट्टी ली थी। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि वह  केरल के मुख्यमंत्री राहत निधि के लिए दादरा और नगर हवेली से एक करोड़ रुपये की राशि सौंपने के लिए आधिकारिक यात्रा पर थे।

स्थानीय मीडिया से उन्होंने कहा कि मैंने कोई महान काम नहीं किया है, मैं यहां एक पर्यटक के तौर पर आया था। यहां के असली हीरो वो अफसर हैं जिन्होंने दिन रात बाढ़ पीड़ितों के बीच रहकर यहां काम किया है। उन्होंने खुद की पहचान उजागर होने को संकोचशील बताया। जब आस पास के लोगों को पा चला वह एक आईएएस अफसर हैं तो उनके साथ लोगों ने सेल्फी लेना शुरू कर दिया।