कबाड़ कलपुर्जो से सरदार वल्लभ भाई पटेल की अद्भुत कलाकृति बनाई

भोपाल। जिसको सबक याद नहीं करने पर हर रोज क्लास में सजा मिलती थी। कई बार तो क्लास में टीचर के नाम पुकारते ही वो मुर्गा बन जाते था। उनको मालूम रहता था कि आज फिर सजा मिलने वाली है। पढ़ाई में दिल नहीं लगने की वजह से उनका घर में भी मार पड़ती थी। जब स्कूल और घर दोनों में सजा की इंतेहा हो गई तो पांचवीं कक्षा की पढ़ाई छोडऩे के साथ घर से विदाई हो गई। लेकिन किसी को क्या मालूम था कि पढ़ाई से खुद को चुराने वाला वाजिद खान एक दिन दुनिया का बेहतरीन और अनोखा कलाकार बनेगा। जी हां हम बात कर रहे दुनिया के एक ऐसे बेहतरीन कलाकार की जिसने अपनी कलाकृतियों से कला जगत में 5 वल्र्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए हैं।

इंदौर के रहने वाले वाजिद खान। इनदिनों इसलिए चर्चा में हैं कि उन्होंने कबाड़े में फैंके जाने वाले आटो पार्टस से एक ऐसी अद्भभुत कलाकृति बनाई है जिसको उजाले में देखने पर वह मोटर पार्टस के कलपुर्जे ढेर लगता है। अंधेरे में उसका शेडो सफेद शीट पर आर्यन मेन सरदार बल्लभ भाई पटेल दिखाई देता है। इस कलाकृति को राजधानी में बन रहे नए बल्लभ भवन में लगाया जाएगा। हांलाकि इस कृति को गुजरात और अफ्रीकी ने भी मांगा है। बुधवार को पटेल की जयंती हैं। वाजिद खान मंगलवार को राजधानी आए थे। राजएक्सप्रेस से खास बातचीत में वाजिद ने बताया कि इस आर्ट को बनाने में उन्हें छह माह लग गए। इस के बाद उन्हें कामयाबी मिली। आज वह खुश हैं कि जयंती पर इसको लोगों तक पहुंचा रहे हैं।

वाजिद ने बताया कि घर से विदा कर दिया था क्यूंकि उस गाँव में जहाँ वो रहते थे वहां वह सहूलियतें नहीं थीं जो वाजिद की सोच को असलियत में उतार सकें। घर छोडऩे के बाद अहमदाबाद पहुँच पेंटिंग और इनोवेशन के काम में जुट गए। वहां वो रोबोट बनाते थे और वही पर उनके हुनर को पहचाना अहमदावाद के प्रोफेसर अनिल गुप्ता ने।

इतने साल की मेहनत और लगन का नतीजा यह निकला कि आज पूरी दुनिया में उनके आर्ट के करोड़ों कद्रदान हैं। वाजिद अपनी यहां तक के यात्रा के लिए प्रोफेसर अनिल गुप्ता श्रेय देते हैं। अपनी जि़न्दगी के इस कामयाबी के मुकाम पर पहुँचने वाले वाजिद को पिछले दिनों आईआईएम अहमदाबाद ने गेस्ट लेक्चर देने के लिए आईआईएम भी बुलाया था ।जहां उन्होंने अपनी जि़न्दगी के संघर्ष से निपटने के लिए तरीके स्टूडेंट्स के साथ शेयर किए। वाजिद खान ने महज 14 साल की उम्र में दुनिया की सबसे छोटी 1 इंच की कपड़े प्रेस करने वाली इस्त्री ईजाद कर लोगों को चकित कर दिया था।

नेल आर्ट का माहरथी हैं वाजिद खान

वाजिद खान नेल आर्ट की वजह से पूरी दुनिया में जाने जाते हैं। उनकी नेल आर्ट कीलों के कला बनाने का तरीका ईजाद की और पूरी दुनिया में इसे पहुँचाया। वाजिद इस आर्ट का इस्तेमाल करते हुए मशहूर हस्तियों जैसे कि महात्मा गांधी, पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम और धीरूभाई अम्बानी और सलमान खान जैसी शख्सित पोट्र्रेट बनाये हैं। वही इंडस्ट्रियल वेस्ट और गोलियों से भी आर्ट पीस बनाते हैं। वाजिद ने इस कला को पेटेंट भी करवाया हैं ।जिसकी बदौलत उनकी इस कला को उनकी अनुमति के बिना कोई कॉपी नहीं कर सकता है।

फीफा वल्र्ड कप में दिखाएंगे अपना हुनर

अपनी कला और समाजसेवा के जूनून की वजह से वाजिद पूरी दुनिया में मिसाल बन गए हैं। साल 2022 में क़तर में होने वाले फीफा वल्र्ड कप में उन्हें दस हजार स्कवेयर फीट की एक कलाकृति बनाने का आर्डर मिला है। जिसके लिए उन्हें 2200 करोड़ रुपए मिलेंगे यह स्कल्पचर दुनिया का सबसे बड़ा स्कल्पचर होगा और वाजिद इसके लिए मिलने वाले सारे पैसे यानि 200 करोड दान में देने वाले हैं।


"To get the latest news update download the app"