जब कांग्रेस उम्मीदवार ने बीजेपी के गढ़ में रोक दी थी मंत्री की हैट्रिक

भोपाल/उज्जैन। विधानसभा चुनाव को लेकर मध्यप्रदेश में सरगर्मी चरम पर है। टिकट को लेकर राजनीतिक दलों में दावेदार भोपाल से लेकर दिल्ली तक दौड़ लगा रहे हैं। इतिहास में भी कुछ इसी तरह के राजनीतिक किस्से दफ्न हैं। जिन्हें सुनकर बहुत कुछ सीखने को मिलता है। बात 1998 के चुनाव की है। उज्जैन उत्तर विधानसभा तब भाजपा का गढ़ मानी जाती थी। आपको जानकर ये हैरानी होगी उस दौर में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने पारस जैन को उनकी परंपरागत सीट से हराया था। 

दरअसल, उज्जैन उत्तर विधानसभा सीट पर कई दिग्गज नेता टिकट की दौड़ में थे। लेकिन उस समय के छात्र नेता राजेंद्र भारती इस सीट पर अपनी किस्मत आजमा कर राजनीति में अपना खाता खोलना चाहते थे। टिकट के लिए उन्होंने दिल्ली रुख किया और अपने एक प्रतिनिधि मंडल के साथ 24, अकबर रोड दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय पहुंचे। माधवराव सिंधिया उस समय अपने दफ्तर में मौजूद थे। उन्हें जैसे ही इस बारे में जानकारी मिली कि उज्जैन से एक प्रतिनिधि मंडल आया है वह ये सुनते ही बाहर आ गए। 

उन्होंने उज्जैन की राजनीति पर प्रतिनिधि मंडल से काफी देर चर्चा की। जब माहौल थोड़ा ठंडा हुआ तब सिंधिया ने भारती से कहा कि उज्जैन उत्तर विधानसभा सीट तो भाजपा का गढ़ है। उन्होंने नसीहत देते हुए भारती को समझाया कि वह किसी और विधानसभा सीट से टिकट मांगे, इस सीट से चुनाव लड़कर वह अपना राजनीतिक करियर खराब कर लेंगे। लेकिन भारती ने अपनी जिद नहीं छोड़ी। वह टिकट की मांग को लेकर अडिग रहे। लिहाजा बाद में पार्टी ने उन्हें इस सीट से उम्मीदवार घोषित किया। भारती ने अपने कहे के मुताबिक इस सीट पर 3800 वोट से जीत दर्ज की। उन्होंने प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशी पारस जैन को केवल हराया ही नहीं उन्हें जीत की हैट्रिक लगाने से भी रोक दिया। 

1998 में मिली इस हार के बाद पारस जैन दोबारा 2003 में इस सीट पर लड़े और अपनी परंपरागत सीट को कांग्रेस के कब्जे से वापस लेने में कामयाब हुए। भले वह 98 में इस सीट पर हैट्रिक लगाने में असफल रहे लेकिन 2003 के बाद से उन्हें इस सीट पर चुनौति देने वाला कोई नहीं मिला।