घर की छत पर बना डाला विमान, प्रधानमंत्री मोदी ने की सराहना, राज्य सरकार ने किया 35 हजार करोड़ का अनुबंध

नई दिल्ली। कहते हैं अगर मन में कुछ ठान लिया जाए तो कोई भी काम मुश्किल नहीं। आज हम एक ऐसे ही शख्स से मिलाने जा रहे हैं जिन्होने 19 साल की कड़ी मेहनत से एक ऐसे काम को अंजाम दे दिया है, जो शायद असंभव सा था। मुंबई के गोरेगांव में रहने वाले अमोल यादव पेशे से कमर्शियल पायलट हैं और इन्होने अब एक एक इतिहास कायम कर दिया है।

वो 90 का दशक था जब अमोल 19 साल की उम्र में अमेरिका में पायलट की ट्रेनिंग लेकर भारत लौटे थे। यहां लौटकर इन्होने एयरक्राफ्ट खरीदने का प्रयास किया तब इन्हें पता चला कि भारत में तो एयरक्राफ्ट बनाए ही नहीं बनाए जाते। सब तभी इनके मन में तब खुद एयरक्राफ्ट बनाने का ख्याल आया। 19 साल पहले चारकोप इलाके में अपने घर की छत पर ही इन्होने विमान बनाना शुरू कर दिया था। साल 2003 तक इन्होने दो एयरक्राफ्ट बनाए, लेकिन दोनों ही असफल रहे। लेकिन अमोल ने हार नहीं मानी और फिर छह साल की मेहनत से साल 2009 में एक नया विमान तैयार किया। इसके लिए पिस्टन इंजन सहित कई पार्ट्स विदेश से मंगवाए और एयरक्राफ्ट ग्रेड के एल्युमिनियम से जहाज का एयरफ्रेम खुद ही तैयार किया। उनका ये प्रयास सफल रहा और अब 19 साल के लंबे संघर्ष के बाद उनके खुद के बनाए छह सीटों वाले देसी विमान को नगर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने उड़ाने की अनुमति दे दी है। उनकी इस उपलब्धि को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सराहा और मिलने के लिए दिल्ली बुलाया गया। उन्होंने 19 सीटों वाले विमान का निर्माण भी शुरू कर दिया है।

अमोल ने 19 साल में हवाई जहाज बनाने पर करीब 5 करोड़ रुपए खर्च कर दिए हैं। उनकी इस लगन को घरवालों ने भी पूरी तरह प्रोत्साहित किया, अमोल न सिर्फ अपनी कमाई इसमें लगा दी बल्कि मां के गहने तक बेचने पड़े। बड़े भाई ने भी इनके इस सपने की खातिर अपना घर गिरवी रख दिया। मगर अब सभी को उनके त्याग का फल मिल गया है। अमोल की सफलता के बाद महाराष्ट्र सरकार ने उनसे 35 हजार करोड़ का अनुबंध किया है। उन्हें पालघर में जगह और एयरस्ट्रिप भी उपलब्ध कराई गई है। दिसंबर में डीजीसीए उनके विमान का परीक्षण करेगा। इसके बाद विमान विदेशी कंपनियां एक से डेढ़ हजार करोड़ रुपए में बनाती हैं, उन्हें अमोल द्वारा 250 करोड़ में बनाने की योजना है।

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