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बिजली कर्मचारियों की चेतावनी -10 दिन में नियमित करो, नही तो करेंगें प्रदेशभर में काम बंद

उज्जैन

अपनी मांगों को मनवाने के लिए सभी वर्गों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। हर कोई आंदोलन और हड़ताल की राह पर चल पड़ा है।इसी कड़ी में बिजली विभाग के आउटसोर्स कर्मचारी सांकेतिक प्रदेश स्तरीय धरने पर बैठ गए हैं। कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी, मगर प्रशासन ने 10 दिन की परमिशन दी है। इसके साथ ही उन्होंने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर इन दस दिनों में उनकी समस्या का समाधान नही किया गया तो वे प्रदेशभर के 45 हजार आउटसोर्स कर्मचारी काम बंद हड़ताल करेंगें।इस विरोध में बिजली कंपनियों का काम करने वाले कम्प्यूटर ऑपरेटर, सब स्टेशन ऑपरेटर, लाइन हेल्पर, मीटर रीडर, सुरक्षा सैनिक, भृत्य, ड्रायवर व कर्मचारी शामिल हुए।

    अगर ऐसा होता है तो प्रदेशभर की बिजली व्यवस्थाएं प्रभावित हो जाएंगी। इसके चलते उपभोक्ताओं की बिजली समस्याओं का समाधान नहीं हो सकेगा। इसके अलावा बिलों में सुधार का काम भी प्रभावित होगा।  लोगों को बिजली गुल होने से लेकर फॉल्ट होने जैसी समस्याओं का सामना खुद ही करना पड़ेगा। 

बिजली कर्मचारियों का आरोप है कि बिजली कंपनी के आउटसोर्स, संविदा, नियमित कर्मचारियों की वेतन विसंगति की समस्या सालों से बनी हुई है। वेतन विसंगति दूर करने के लिए बिजली कर्मचारी लंबे समय से मांग कर रहे हैं। लेकिन इसके बाद भी इस समस्या का आज तक कोई निराकरण नहीं हो सका।बीते तीन सालों में 500 से अधिक ज्ञापन मुख्यमंत्री को दे चुके हैं किंतु कोई पहल नहीं की गई। मौजूदा साल में आउटसोर्स के रूप में काम करने वाले 400 से अधिक लाइनमैनों की मौत चुकी है। मृतकों को न तो ठेकेदारों से सहायता मिलती है और न ही बिजली कंपनी से। क्योंकि वे कर्मचारी किसके हैं, यह साफ नहीं है।

प्रमुख मांगें

-समान काम समान वेतन दिया जाए।

-जोखिम को शामिल किया जाए।

-बीमा एवं ग्रेज्युटी का लाभ दिया जाए।

-बिजली कंपनी में नियमितीकरण किया जाए।


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