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सही दाम ना मिलने पर फूटा किसानों का गुस्सा, कलेक्टर दफ्तर के बाहर फेंका लहसुन-चना

उज्जैन

 फसलों के उचित दाम ना मिलने पर किसानों में सरकार के प्रति आक्रोश है। टमाटर के बाद चना-लहसुन के सही दाम ना मिलने पर अब किसान फसलों को सड़कों पर फेंकने के लिए मजबूर हो रहे है। ताजा मामला उज्जैन से सामने आया है। जहां  चना और लहसुन उपज के सही दाम नहीं मिलने से परेशान किसानों ने कलेक्ट्रेट के बाहर जमकर हंगामा किया और वही लहसुन और चना कलेक्टर के दफ्तर के बाहर उड़ेल दिया। 

इस मौके पर उनके साथ बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता भी शामिल हुए औऱ सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करने लगे। फिर कुछ देर धरने पर बैठे। अफसरों को ज्ञापन दिया और चले गए। नेताओं के जाने के बाद किसानों को सड़क से उपज उठाना पड़ी। इनके जाने के बाद रोड पर कचरा फैला रहा, जिस पर एडीएम ने नगर निगम उपायुक्त को सूचना देकर साफ कराया। 

किसानों का आरोप है कि फसल की बंपर पैदावर होने के बावजूद फसलों के सही दाम नही मिल रहे है। किसान अपनी फसल बेचने के लिए परेशान हो रहा है। मंडी के चक्कर लगा रहा है।एसएमएस मिल ही नहीं रहे है। वहीं, किसानों को महज 40 क्विंटल तक ही चना फसल उपार्जन केंद्र पर लाने के निर्देश एसएमएस में दर्ज किए जा रहे है। इस बात से नाराज लोगों ने कलेक्ट्रेट के सामने अपना गुस्सा निकालते हुए लहसुन और चना जमीन पर फेंककर नाराजगी जताई है। किसानों की मांग है कि लहसुन और चन्ना को भावांतर योजना में शामिल किया जाए।

चना-लहसुन फसल के लिए समर्थन मूल्य देरी से घोषित किया था। फसल विक्रय के लिए पंजीयन और भोपाल से एसएमएस भेजने की कार्रवाई से भी परेशानी बढ़ी है।उधर लहसुन फसल में 1600 रुपये क्विंटल के ऊपर बिकवाली पर ही भावांतर योजना का लाभ देने की सरकार की घोषणा से किसान नाराज हैं।


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