नम आंखों से दी गई ब्रह्मलीन महर्षि मौनी बाबा को अंतिम विदाई, बड़ी संख्या में उमड़े अनुयायी

उज्जैन।

देशभर में चर्चित और उज्जैन के तपस्वी मौनी बाबा का आज रविवार को विधिविधान से उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई और गंगाघाट पर अंतिम संस्कार किया गया।।उनकी इस यात्रा में देशभऱ से लोग शामिल होने पहुंचे। इसके पहले अंतिम दर्शन के लिए रविवार सुबह उनकी पार्थिव देह को आश्रम से बाहर रखा गया। जहां भक्तों का दर्शन के लिए तांता लगा रहा।हर किसी की आंखों में आंसू थे। बाबा की अंतिम यात्रा शंखनाद के साथ शिप्रातट स्थित मौन तीर्थ गंगा घाट से शुरु की गई थी।  यहां उनके परमशिष्य सुमनजी की अगुवाई में उनके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरे विधि विधान से की गई।

पुणे में इलाज के दौरान हुआ निधन

 बाबा का शनिवार सुबह निधन हो गया था। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे और जिसके चलते उनका इलाज पिछले एक महिने से पुणे के एक निजी अस्पताल में चल रहा था।  उनका पार्थिव शरीर आज देऱ शाम हेलिकॉप्टर से इंदौर फिर उज्जैन लाया जाएगा। इसके बाद भक्तों के अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा।इसके बाद रविवार सुबह उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी। उनकी आयु लगभग 110  वर्षीय बताई जा रही है।उज्जैन के मौनी बाबा उस समय चर्चाओं में आए थे जब उनके अर्जुन सिंह के साथ रिश्ते गहरे नजर आने लगे थे। 

वीवीआईपी है भक्त

अमर सिंह , दिग्विजय सिंह , अर्जुन सिंह , उमा भारती, तत्कालीन सांसद अजीत जोगी सहित कई नामी हस्तियां मौनी बाबा के अनुयायी है। वे ज्योतिष के जानकार थे, तो तंत्रमंत्र क्रिया में भी पारंगत थे।जिसके चलते इन नेताओं का उनके आश्रम पर आना-जाना लगा रहता था।लोग यहां तक कहते थे कि अर्जुन सिंह और उनकी पत्नी ने तो उन्हें अपना गुरु मान लिया था। 'अर्जुन सिंह-एक सहयात्री इतिहास का' किताब में इन बातों का उल्लेख मिलता है।

साल में दो बार देते थे दर्शन

मौनी बाबा का उज्जैन में ही मंगलनाथ रोड पर आश्रम है। वे पिछले सात दशक से गंगाघाट के किराने एक पेड़ के नीचे रह रहे थे। करीब 110 वर्षीय मौनी बाबा भक्तों को वर्ष में सिर्फ दो बार गुरु पूर्णिमा तथा 14 दिसंबर को उनके जन्म दिन पर ही आश्रम में दर्शन होते थे। बाबा अधिकांश समय एकांत में बिताते थे।

सीएम ने ट्वीट कर दी श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री शिवराज ने ट्वीट कर कहा कि प्रकांड विद्वान और लोकहित में संपूर्ण जीवन समर्पित करने वाले उज्जैन के मौनीबाबा को सादर श्रद्धांजलि। 100 वर्ष से अधिक के जीवनकाल में आपने मौनतीर्थ को मानव कल्याण का केंद्र बनाया। बाबा के गोलोकवास से दुखी जनमानस के साथ मैं भी उनके चरणों में नमन करता हूँ।

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