चिल्लर कहकर ठुकराई फीस, परीक्षा नहीं दे पाई मासूम

विदिशा| कहा जाता है कि जब आपको अपने बच्चों को पढ़ाने की पूरी इच्छा हो तो फिर आपको कोई नहीं रोक सकता क्योंकि ऐसे समय में आप अपने बच्चों की फीस जमा करने के लिए खूब मेहनत करते हैं और उनकी फीस भरते भी हैं | अब चाहे आप मिडिल क्लास फैमिली से हों या फिर बीपीएल धारी ही क्यों न हों, मगर कभी कभी कुछ अजीब सी चीजें सामने आतीं हैं जिसमें पता चलता है कि आप बच्चे को पढ़ाना तो चाहते हैं और मेहनत कर फीस जमा करने के लिए भी तैयार हैं मगर पढ़ा नहीं पा रहे| ऐसा ही एक मामला बीते दिन विदिशा जिले में सामने आया है जहां एक पिता ने साइकल के पंचर जोड़-जोड़कर एक-एक पैसा अपनी बेटी की फीस के लिए इकठ्ठा किया। मगर स्कूल प्रबंधन और बैंक ने चिल्लर लेने से मना कर दिया। तो नतीजा यह निकला कि न तो मासूम बच्ची एग्जाम दे पाई और न ही वह स्कूल जा सकी। 

हम आपको बता दें कि साइकिल दुकान पर पंक्चर जोड़कर ठाकुरसिंह रघुवंशी ने अपनी बेटी की फीस जमा करने दो हजार रुपए की चिल्लर इकठ्ठा की थी। तो जब पिता सेंट जोसेफ कांवेंट स्कूल में कक्षा दूसरी में पढ़ रही अपनी बेटी तेजस्वी की फीस 1970 रुपए जमा करने गया तो स्कूल प्रबंधन ने चिल्लर लेने से इंकार कर दिया। पिता चिल्लर के बदले नोट लेने के लिए आईसीआईसीआई और बैंक ऑफ इंडिया गया तो दोनों ही बैंकों में चिल्लर लेने से इंकार कर दिया गया। फीस जमा होने में देरी के कारण स्कूल प्रबंधन ने छात्रा को परीक्षा में नहीं बैठाया।

 

फीस के लिए चिल्लर के रूप में जुटा सका राशि

ठाकुर सिंह के अनुसार उसने फरवरी माह की फीस 6 फरवरी को जमा कराई थी। इसके बाद 16 फरवरी से उनकी पुत्री की वार्षिक परीक्षाएं शुरू हो गईं और स्कूल प्रबंधन ने उन्हें परीक्षा के पहले आगामी माह की फीस 1970 रूपए एडवांस में जमा कराने को कहा। ठाकुर सिंह ने इस राशि का इंतजाम तो कर लिया, लेकिन यह राशि उसके पास 5 और 10 रूपए के सिक्कों के रूप में थी। जो नहीं लिए गए।

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