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बेटी बचाओ अभियान की हकीकत, CM की कर्मभूमि विदिशा में ही घटी बेटियों की संख्या

विदिशा

सरकार भले ही बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसे तमाम अभियान चलाकर बेटी बचाने का संदेश दे रही हो लेकिन जमीनी सच्चाई तो कुछ और ही बयां करती नजर आ रही है।ताजा आकंड़ा मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में देखने को मिला है। जहां लड़कों की तुलना में लड़कियां की संख्या में कमी आई है। चौंकने वाली बात तो ये है कि ये जिला मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की कर्मभूमि रहा है। अब सोचने वाली बात है कि जब मुख्यमंत्री के कर्मभूमि रहे जिले का ये हाल है तो बाकी जिलों का क्या होगा।जहां विदिशा जिले के बाद कम लिंगानुपात के मामले में होशंगाबाद, शिवपुरी, शहडोल और मुरैना का नंबर आता है।वही सबसे ज्यादा लिंगानुपात वाले जिलों में सीहोर के बाद बालाघाट, सिवनी, इंदौर और शाजापुर हैं।  

दअसलल, भारत सरकार के नीति आयोग की रिपोर्ट कहती है कि विदिशा जिले में लड़कियां की संख्या में कमी आई है और लड़को की संख्या में इजाफा हुआ है। 2017 में विदिशा में 1000 लड़कों के मुकाबले 782 लड़कियों का जन्म लिया है।प्रदेश के औसत प्रति हजार लड़कों पर 918 लड़कियों के मुकाबले 136कम है।वही सीएम के गृह जिले की बात करे तो यहां1000 लड़कों पर 992 लड़कियों का जन्म हुआ है।

इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग से जारी हेल्थ बुलेटिन में 2017 दिसंबर तक विदिशा में करीब 20 हजार प्रसव कराए गए है, जिनमें 11 हजार 274 लड़के और 8 हजार 800 लड़किया पैदा हुई है।प्रदेश के हेल्थ बुलेटिन के मुताबिक सबसे ज्यादा लिंगानुपात सीहोर जिले में दर्ज हुआ है। 

लगातार देश-प्रदेश में घटते लिंगानुपात का कारण रुढ़िवादी मानसिकता, बाजारों में बिकने वाली गोलियां और ग्लैमर की दुनिया में आगे बढ़ने की होड़ है। भले ही लोग शिक्षित हो चुके है , लेकिन आज भी बेटियों को लेकर उनकी मानसिकता में कोई बदलाव नही आया है। जिसके कारण लोग कोख मे ही बेटी को मारने का बाप कर बैठते है।

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