कागजों पर जिला ODF घोषित, शौचालय बनाने हाथों में लोटा लेकर कलेक्ट्रेट पहुंची महिलाएं

विदिशा

केंद्र और राज्य सरकार खुले में शौच को रोकने के लिए और शौचालय बनाने के लिए हर वर्ष करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। कुछ ऐसा ही नजारा एमपी में भी देखने को मिला है।यहां स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत खुले में शौच मुक्त के तहत मध्यप्रदेश के विदिशा जिले को बीते 31  मार्च को ओडीएफ घोषित किया गया था। लेकिन यहां हालात तो कुछ और नजर आ रहे है।केवल कागजों पर ही इसे ओडिएफ घोषित किया गया है, वास्तविकता में सच्चाई तो कुछ और है। जी हां आज जिले की सैकड़ों महिलाएं हाथों में लोटा लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंची और जमकर हंगामा किया।जिसके बाद अधिकारियों द्वारा उन्हें कार्रवाई का आश्वासन दिया गया।

महिलाओं का कहना है कि उनके घर में शौचालय नही बना हुआ है , जिसके चलते उन्हें रेलवे ट्रैक पर सुबह-सुबह शौच के लिए जाना पड़ता है। ऐसे करने पर रेलवे के अधिकारी उन पर जुर्माना लगा देते है और दोबारा यहां आने से मना कर देते है। लोटा लेकर प्रशासन के सामने प्रदर्शन करने का मकसद है कि अधिकारियों को शर्म आए और जल्द से जल्द इन महिलाओं को शौचालय की सुविधा मिल सके।

महिलाओं ने कलेक्टर से मांग की है कि उनके घर भी शौचालय बनवाए जाए, ताकी उन्हें शौच के लिए बाहर ना जाना पड़े।

गौरतलब है कि स्वच्छ भारत अभियान भारत सरकार द्वारा आरंभ किया गया है। यह अभियान महात्मा गाँधी के जन्मदिवस 02 अक्टूबर 2014 को आरंभ किया गया था। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने देश को गुलामी से मुक्त कराया, परन्तु 'स्वच्छ भारत' का उनका सपना पूरा नहीं हुआ। महात्मा गांधी ने अपने आसपास के लोगों को स्वच्छता बनाए रखने संबंधी शिक्षा प्रदान कर राष्ट्र को एक उत्कृष्ट संदेश दिया था।स्वच्छ भारत का उद्देश्य व्यक्ति, क्लस्टर और सामुदायिक शौचालयों के निर्माण के माध्यम से खुले में शौच की समस्या को कम करना या समाप्त करना है।  सरकार ने 2 अक्टूबर 2019, महात्मा गांधी के जन्म की 150 वीं वर्षगांठ तक ग्रामीण भारत में 1.96 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित लागत (यूएस $ 30 बिलियन) के 1.2 करोड़ शौचालयों का निर्माण करके खुले में शौंच मुक्त भारत (ओडीएफ) को हासिल करने का लक्ष्य रखा है।