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धर्म गुरुओं का आह्वान-घर में रहें और साबुन से हाथ धोएं, कोरोनो से लड़ने रखें सामाजिक दूरी

Written by:Gaurav Sharma
Last Updated:
धर्म गुरुओं का आह्वान-घर में रहें और साबुन से हाथ धोएं, कोरोनो से लड़ने रखें सामाजिक दूरी

भोपाल।
कारोना वायरस का फैलाव रोकने के लिए जारी प्रयासों में भोपाल के धर्म गुरुओं ने भी पहल की है। उन्होंने जनता से अपील की है कि कोरोना से निपटने के लिए घर में ही रहें। साबुन से हाथ धोएं। सामाजिक दूरी बनाए रखें।
धर्मगुरु परमवीर सिंग वाजी, प्रधान गुरुद्वारा प्रबन्ध समिति, हाफिज मोहम्मरद आरिफ इमाम, मासूम मस्जिद, सैयद अय्यूब अली, सचिव पयाम-ए-इंसानियत इकाई, भोपाल, अष्टासवक्र पुराण विकास, श्री 108 ज्ञानसागर महाराज दिगंबर जैन आचार्य, चंदनमती माताजी, प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका, ग्यामति माताजी, गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि, भंते शाक्यिपुत्र सागर, प्रमुख भिक्षु, बुद्ध भूमि, भोपाल, जयकिशन लाल चंदानी, चेयरमैन ईदगाह हिल्स सिंधी पंचायत, दीदी बीके अवधेश, क्षेत्रीय निदेशक, ब्रह्मकुमारी, भोपाल उन प्रमुख धर्मगुरुओं में शामिल हैं जिन्होंने अपील जारी की है। वीडियो अपील में सभी ने कहा है कि कोरोना को परास्त करने के लिए धैर्य बनाए रखें।

इससे पहले भोपाल के शाही क़ाज़ी और भोपाल के आर्कबिशप डॉ. लियो कॉर्नेलियो एसवीडी कोरोनो वायरस से लड़ने के लिए अपील जारी कर चुके हैं। प्रशिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. स्वाति तिवारी ने कहा कि धर्मगुरुओं के प्रति समाज में बड़ी आस्था है। लोग बड़े विश्वास से उनकी बातों का अनुसरण करते हैं। यूनिसेफ मध्य प्रदेश के प्रमुख माइकल जुमा ने उम्मीअद जताई है कि कोरोना वायरस से निपटने में धर्म गुरुओं की अपील कारगर होगी और लोग उनकी बात मानते हुए साबुन और पानी से हाथ धोने, छींकने पर मुंह और नाक को ढंकने जैसी स्वच्छता आदतों को अपना कर कोरोना से निपटने के लिए शासन के प्रयासों को सफल बनाएंगे।

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma
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