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ग्वालियर से संदिग्ध युवक के मिलने से फैली सनसनी, प्रशासन ने किया क्वारेंटाईन

Written by:Gaurav Sharma
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ग्वालियर।अतुल सक्सेना।

लॉक डाउन के बीच फूलबाग गुरुद्वारे के पास किसी संदिग्ध युवक के उल्टियां करने की सूचना पर हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम ने युवक से पूछताछ की। युवक मुस्लिम है और चार दिन से यहीं भटक रहा है । टीम ने युवक को सेनेटाइज किया और फिर उसे खाना खिलाया।

जानकारी के अनुसार प्रशासन और पुलिस के पास फूलबाग गुरुद्वारे से किसी सेवादार ने फोन किया कि एक संदिग्ध युवक चार दिनों से गुरुद्वारे के आस पास भटक रहा है। सूचना पर तहसीलदार शिवानी पांडे और पुलिस अधिकारी वहाँ पहुंचे और सबसे पहले युवक को सेनेटाइज किया उसके बाद उसे बिस्कुट और अन्य खाने की चीजें दी। प्रशासनिक अमले के साथ गए डॉक्टर्स ने युवक की जाँच पड़ताल की। पूछताछ में मालूम चला कि युवक मुस्लिम है उसका नाम शांतनु पुत्र शाहरुख खान है। वो उदयपुर राजस्थान का रहने वाला है और होशंगाबाद से पिछले महीनें दोस्तों के साथ यहाँ ट्रेन से आया था लेकिन फिर दोस्त का घर नहीं मिला तो यहाँ वहाँ भटक रहा था। वो फुटपाथ पर रह रहा था उसके परिवार में कोई नहीं है वो उसे कुछ लोग परेशान कर रहे हैं, वो चार दिन से फूलबाग गुरुद्वारे के पास रह रहा था। आज वो जब गुरुद्वारे के पास पीने के लिए पानी ले रहा था तो उस घबराहट होने लगी और वो उल्टियां करने लगा जिससे घबराकर लोगों ने प्रशासन को सूचना दी। प्रशासन के साथ गई टीम ने युवक को क्वारेंटाईन के लिए जयारोग्य अस्पताल में भेज दिया है।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma
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