एडवेंचर है पसंद...तो इंडिया के इन 10 नेशनल पार्क में लें वाइल्ड लाइफ सफारी का आनंद

सैर सपाटा: गर्मियों की छुट्टियां चल रही हैं और ऐसे में अगर आप कहीं घूमने का प्लान कर रहे हैं तो किसी वन्य प्राणी उद्यान की सैर पर जाने का आइडिया काफी अच्छा है। इससे जहां प्रकृति की गोद में पशु-पक्षियों को देखने का मौका मिलेगा, वहीं बच्चे इन वन्य प्राणियों के बारे में नई जानकारियां भी हासिल कर पाएंगे। तो आईये जानते हैं कि भारत में आप किन किन राष्ट्रीय उद्यानों के भ्रमण पर जा सकते हैं –


1.  अरिगनार अन्ना जूलॉजिकल पार्क – ये पार्क तमिलनाडु में स्थित है जिसे वंडालूर चिड़ियाघर के नाम से भी जाना जाता है। चेन्नई से लगभग 31 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस पार्क की स्थापना 1855 में हुई थी। 602 हेक्टेयर में फैले इस ज़ू को भारत का पहला पब्लिक ज़ू होने का गौरव प्राप्त है।


2.  बांधवगढ़ नेशनल पार्क - मध्यप्रदेश के विंध्य पर्वत में बांधवगढ़ नेशनल पार्क करीब 400 किलोमीटर में फैला है। अपनी जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध इस पार्क में घने जंगल, मज़बूत चट्टानें और लंबे खुले मैदान हैं। यहां 250 से ज्यादा पक्षियों की प्रजातियां और अनेक जानवर हैं। इस वन में आपको बाघ, लकड़बग्घा, एशियाई सियार, बंगाली लोमड़ी, भालू, जंगली बिल्ला, राटेल, तेंदुआ सहित कई जानवर देखने को मिल सकते हैं।


3.  बांदीपुर नेशनल पार्क – कर्नाटक में मैसूर– ऊटी राजमार्ग पर पश्चिमी घाट के पहाड़ों के बीच सुरम्य वातावरण में स्थित नेशनल पार्क प्रकृति प्रेमियों के एक आदर्श स्थान है। 1931 में 90 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैले हुए इस पार्क की स्थापना मैसूर के महाराजा ने की थी, जो अब 800 वर्ग किलोमीटर में फैल चुका है। यहां बाघ, चार सींगों वाला हिरण, विशाल गिलहरी, हाथी, हार्नबिल, जंगली कुत्ते, चीता, भालू सहित अनेक जानवरों के साथ कई दुर्लभ प्रजाति के पक्षी भी पाए जाते हैं।


4.  चिन्‍नार वन्‍यजीव अभयारण्‍य -  ये केरल के मुन्नार, इडुक्की ज़िले से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस अभयारण्‍य में 34 प्रकार के स्‍तनधारी जीव पाएं जाते है जिनमें पैंथर, स्‍पॉटेड हिरन, गौर, टाइगर, हाथी, बॉनेट मकाऊ, नीलगिरि तहर, हनुमान मंकी और ग्रिल्‍ड जाइंट स्‍वक्‍वीरिल आदि पाएं जाते है।


5.  कॉर्बेट नेशनल पार्क - यह उत्तराखण्ड के नैनीताल जिले में स्थित है और वन्य जीव प्रेमियों के लिए स्वर्ग माना जाता है। पहले यह पार्क रामगंगा राष्ट्रीय उद्यान के नाम से जाना जाता था लेकिन 1957 में इसका नाम जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क (कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान) रखा गया। इस पार्क का नाम प्रसिद्द ब्रिटिश शिकारी, प्रकृतिवादी और फोटोग्राफर जिम कॉर्बेट के नाम पर रखा गया है। बाघों के रक्षा के उद्देश्य से बाघ परियोजना पहल के तहत आने वाला यह पहला पार्क है।


6.  दुधवा राष्‍ट्रीय पार्क – ये भारत-नेपाल सीमा के पास उत्‍तर प्रदेश के तराई बेल्‍ट में स्थित है। इसे 1958 में वन्‍यजीव अभयारण्‍य के रूप में स्‍थापित किया गया था और 1977 में यह एक राष्‍ट्रीय उद्यान बन गया। अब ये दो भागों में विभाजित है, पहला किशनपुर वन्‍यजीव अभयारण्‍य और दूसरा कतरनियाघाट वन्‍यजीव अभयारण्‍य। इस क्षेत्र में ज्यादातर जलोढ़ मैदान, झील, पूल और कई नाले हैं। यहां विविध वनस्‍पतियों के साथ विभिन्‍न प्रकार के जीव जन्‍तु और पक्षी पाए जाते हैं।


7.   गिर राष्ट्रीय उद्यान – एशिया में शेर में सिर्फ गिर राष्ट्रीय उद्यान, गुजरात में ही पैदा होते है। गिर अभयारण्य 1424 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इसके पास ही मितीयाला वन्यजीव अभयारण्य भी स्थित है।  यहां शेर देखने के लिए दुनिया भर से लोग आते हैं। दुनिया में शेरों की संख्या बढ़ाने के लिए इस उद्यान को आरक्षित घोषित किया गया है। माना जाता है कि दुनिया में विश्व में अफ्रीका के बाद बस इसी जगह शेर बचे हैं।


.  कान्हा राष्ट्रीय उद्यान – मध्यप्रदेश में स्थित कान्हा भारत का एक प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान हैं। यहां की प्राकृतिक सुन्दरता हमेशा ही पर्यटकों के लिए का केन्द्र रही है। कान्हा जीव जन्तुओं के संरक्षण के लिए विख्यात है। यह अलग-अलग प्रजातियों के कई पशु पाए जाते हैं। यह पार्क 1945 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। रूडयार्ड किपलिंग की प्रसिद्ध किताब और धारावाहिक जंगल बुक की प्रेरणा भी इसी स्‍थान से ली गई थी।


9.  काजीरंगा राष्‍ट्रीय उद्यान – असम में स्थित काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान लुप्तप्राय भारतीय एक सींग वाले गैंडे का घर है। साथ ही दुनिया में बाघों की सबसे अधिक घनत्व को समयोजित करते हुए वर्ष 2006 में इसे बाघ अभयारण्य के रूप में भी घोषित किया गया। यूनेस्को द्वारा इसे विश्व विरासत स्थल भी घोषित किया गया है। यह लगभग 429.93 कि.मी के वर्ग क्षेत्र में फैला है।


.   पेंच नेशनल पार्क – मध्यप्रदेश में सतपुड़ा की पहाड़ियों के दक्षिणी भाग में स्थित है। इसका नाम पेंच नदी के नाम पर पड़ा है जो नेशनल पार्क के साथ-साथ उत्तर से दक्षिण की और बहती है। यह पार्क मध्य प्रदेश की दक्षिणी सीमा में महाराष्ट्र के पास स्थित है। महाराष्ट्र सरकार द्वारा इसे 1983 में नेशनल पार्क घोषित किया गया और 1992 में इसे अधिकारिक रूप से भारत का उन्नीसवां टाइगर रिजर्व घोषित किया गया।