लोकसभा चुनाव से पहले एक और मास्टरस्ट्रोक की तैयारी में सरकार

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भोपाल। विधानसभा चुनाव में किसानों की कर्जमाफी का वादा कर सत्ता में आई कांग्रेस अब गरीबों को साधने की तैयारी में जुट गई है। खबर है कि अम्मा कैंटीन और दीनदयाल रसोई योजना की तर्ज पर कांग्रेस लोकसभा चुनाव से पहले इंदिरा गांधी कैंटीन योजना शुरु करने के मूड में है। इस कैंटीन में दस रुपये में लोगों को भरपेट खाना खिलाया जाएगा। इस कैंटीन के खोलने के पीछे गरीब वर्ग को खुश करने की तैयारी है, जिसका लाभ पार्टी को आगामी चुनाव में भी हो| हालांकि यह कितना सफल होगा ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा। 

दरअसल, सबसे पहले तमिलनाडु में स्वर्गीय मुख्यमंत्री जयललिता ने अम्मा कैंटीन की शुरुआत की थी। इसके बाद इस कैंटिन की तर्ज पर भाजपा ने अनेक राज्यों में इसकी शुरुआत की। हालांकि हर राज्य में इसका नाम बदला गया था। मध्यप्रदेश में इसका नाम दीनदयाल रसोई योजना रखा गया, जिसमें पांच रुपये में गरीब तबके के लोगों को भोजन करवाया जाता है, हालांकि यह योजना उतनी सफल नही हो पाई जितना अम्मा की कैंटीन। योजना के शुरु होते ही कई गड़बड़ियां सामने आई है और अब स्थिति बंद होने जैसी है। कमलनाथ सरकार जल्द ही इसे बंद कर सकती है। इसी को देखते हुए लोकसभा चुनाव से पहले अब कांग्रेस इंदिरा कैंटीन योजना शुरु करने की तैयारी में हैं। इंदिरा कैंटीन में महज 10 रुपये में लोगों को भरपेट खाना मिलेगा। खबर है कि  इसका प्रस्ताव कांग्रेस से जुड़े और व्यापमं के व्हिसलब्लोअर आनंद राय ने सरकार को सौंपा है, इसका कांग्रेस ने पूरा खाका भी तैयार कर लिया है, जल्द ही प्रस्ताव को कैबिनेट में रख मंजूरी दी जाएगी,ताकी जल्द से जल्द इसे शुरु किया जा सके। 

वर्तमान में कर्नाटक में इंदिरा गांधी कैंटिन चल रही है, जिसका शुभारंभ 2017 में राहुल गांधी ने किया था।  कर्नाटक में पहले चरण में 101 कैंटीन खोली गई थी जिसमें हर दिन 5 रुपये में शाकाहारी नाश्ता और 10 रुपये में दोपहर का भोजन और इसी दाम में रात का भोजन मुहैया कराया जा रहा है। फिलहाल कर्नाटक में 162 इंदिरा कैंटीन संचालित हो रहीं है इसी की तर्ज पर अब मध्यप्रदेश सरकार भी राज्य में इंदिरा कैंटीन शुरू करने की योजना बना रही है,ताकी लोकसभा चुनाव में इसका कांग्रेस को फायदा मिल सके।हालांकि बीजेपी ने इस योजना पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि जब पहले से ही भाजपा सरकार की योजना चल रही है तो उसे बंद करना कहां की समझदारी है। सरकार द्वेष भावना के साथ काम कर रही है।

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