बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मी के बीच जेडीयू नेता नीतीश कुमार और एलजेपी (आर) अध्यक्ष चिराग पासवान की राजनीतिक दुश्मनी दोस्ती में बदल गई है। 2020 में एनडीए से अलग होकर चिराग ने नीतीश को गहरा झटका दिया था, जब उनकी पार्टी ने 135 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और जेडीयू को मात्र 43 सीटें ही मिलीं। अब दोनों एनडीए के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं, जहां चिराग 29 सीटों पर मैदान में हैं, जबकि जेडीयू और बीजेपी 101-101 सीटों पर।
2020 चुनाव में चिराग की एलजेपी वोट कटवा साबित हुई थी, जिससे जेडीयू को कम से कम 25 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। अशोका यूनिवर्सिटी के डेटा के अनुसार, 120 सीटों पर एलजेपी ने जेडीयू का खेल बिगाड़ा, जबकि खुद सिर्फ एक सीट जीती। इसके उलट, 2024 लोकसभा चुनाव में एनडीए के साथ लड़ते हुए चिराग ने अपनी सभी 5 सीटें जीतीं, जेडीयू 12 और बीजेपी 12 सीटें हासिल की, जिससे गठबंधन को 30 सीटें मिलीं।
मजबूत आधार दुसाध समाज
चिराग का मजबूत आधार दुसाध समाज है, जो बिहार में 5.31% आबादी रखता है और 20-25 सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है। 2020 में अकेले लड़कर एलजेपी ने 5.8% वोट हासिल किए थे। अब जेडीयू के साथ मिलकर वोट बिखराव का खतरा नहीं है, और दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर एकजुट हो रहे हैं। चिराग की ‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट‘ नीति युवाओं को आकर्षित कर रही है।
नीतीश का चिराग के घर जाना
नीतीश और चिराग की केमिस्ट्री का ताजा उदाहरण छठ के खरना पर नीतीश का चिराग के घर जाना है, जो पुरानी कड़वाहट भुलाने का संदेश देता है। चिराग ने नीतीश को सीएम उम्मीदवार घोषित किया है। इस गठबंधन से जेडीयू उन 25 सीटों पर मजबूत हो सकती है जहां 2020 में नुकसान हुआ था, जबकि चिराग अपनी पार्टी को मजबूत करने के साथ एनडीए की जीत में योगदान देंगे।





