खुद के खर्चे पर सूरत से डिंडोरी पहुंचे 63 मजदूर, स्वास्थ्य विभाग कर रहा जांच

डिंडोरी।प्रकाश मिश्रा

कोरोना वायरस के चलते लाक डाउन में फंसे मजदूरों के हाल बेहाल हैं। कई राज्यों में रोजी-रोटी कमाने गए मजदूरों के सामने एक और जहां रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है वही अब वे अपने घर पहुंचने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।

मंगलवार की सुबह ऐसा ही एक मामला सामने आया जहां गुजरात के सूरत से 63 मजदूरों का एक जत्था ट्रक में भरकर डिंडोरी जिला मुख्यालय पहुंचा। इन मजदूरों के सूरत से डिण्डोरी तक पहुंचने की कहानी आज तक केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के द्वारा किए जा रहे मजदूरों की मदद के दावों की पोल खोलती नजर आई। बता दें की सूरत की कपड़ाफैक्ट्री में काम करने वाले डिण्डोरी जिले के विभिन्न ग्रामों के निवासी मजदूर लॉकडाउन चलते पिछले 3 महीनों से परेशान हो रहे थे। फैक्ट्रियां बंद होने के कारण जहां रोजी-रोटी का संकट सामने आ खड़ा हुआ।

वही इस महामारी की चपेट में आने का डर मजदूरों को अपने घर की और प्रस्थान करने को मजबूर कर दिया। किंतु आवागमन के सभी साधन बंद होने के कारण इन्हें अपने ग्रहग्रामों तक पहुंचना कठिन हो गया। मजदूरों की मानें तो इस कठिन समय में ना तो गुजरात की सरकार ने उनकी कोई मदद की और ना ही मध्य प्रदेश की सरकार की तरफ से कोई सहायता प्राप्त हुई। मजदूरों ने अपने स्वयं के खर्चे पर एक ट्रक भाड़े में लिया मजदूरों ने बताया कि प्रति व्यक्ति 2700 रुपये की दर से 1,67,400 रुपये में सूरत से डिंडोरी तक आना तय किया गया है।

गर्भवती महिलाएं और बच्चे भी शामिल

जिस ट्रक में मजदूरों को भेड़ बकरियों की तरह भरकर लाया गया था उसमें गर्भवती महिलाएं और मासूम बच्चे भी सवार थे मजदूरों ने बताया कि विभिन्न शहरों और ग्रामों से होते हुए वे डिण्डोरी तक पहुंचे हैं इस बीच जहां कहीं भी उन्होंने रुकने अथवा आराम करने का प्रयास किया है वहां लोगों ने उनका विरोध किया। पिछले तीन-चार दिनों से बगैर खाए पिए बड़ी कठिनाई से सफर तय कर डिंडोरी तक पहुंचे।

स्वास्थ्य परीक्षण कर किया क्वॉरेंटाइन

मजदूरों का दल जिला मुख्यालय में पहुंचने की खबर पाते ही नगर परिषद अध्यक्ष पंकज तेकाम मौके पर पहुंचे और उनके जलपान की व्यवस्था बनाई ।मजदूरों की आने की सूचना सीएमएचओ डॉ आरके मेहरा को दी गई वे भी मौके पर पहुंचे और मजदूरों का स्वास्थ्य परीक्षण करवाया। फिलहाल सभी मजदूरों का स्वास्थ्य परीक्षण किए जाने के पश्चात उन्हें जिला मुख्यालय में बने क्वॉरेंटाइन सेंटर में रखा गया है।