दिग्विजय की “पायलट” को सलाह- ना चले ‘सिंधिया’ के रास्ते पर, पार्टी में लौट आएं

भोपाल।

मध्य प्रदेश के सियासी उलटफेर(Political disturbances of Madhya Pradesh) के बाद अब राजस्थान(rajasthan) में भी सियासी घटनाक्रम पल पल अपने हालात बदल रहे हैं। मध्य प्रदेश के सियासी तर्ज पर ही राजस्थान में गहलोत सरकार(gehlot government) को सत्ताविहीन करने की कोशिश की जा रही है। जिसके बाद अब कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह(Congress leader and Rajya Sabha MP Digvijay Singh) ने सचिन पायलट(sachin pilot) को सलाह दे डाली। दिग्विजय सिंह ने रविवार को एक समाचार एजेंसी से बात करते हुए कहा कि पायलट(piolt) सिंधिया(scindia) के रास्ते पर ना चले। उन्होंने कहा कि महत्वाकांक्षी होना जरूरत है मगर विचारधारा की प्रतिबद्धता भी जरूरी होती है।

दरअसल रविवार को समाचार एजेंसी से बात करते हुए पहली बार दिग्विजय सिंह ने राजस्थान के सियासी घटनाक्रम पर खुलकर अपनी बात रखी। राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस में पायलट का भविष्य उज्जवल है वह ज्योतिरादित्य सिंधिया के रास्ते पर ना भटके। वहीं उन्होंने राजनीतिक घटनाक्रम के लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहराया है। दिग्विजय सिंह ने बताया कि उन्होंने सचिन पायलट से बात करने के लिए उनके फोन पर संपर्क साधा था किंतु उनसे बात नहीं हो सकी। इसके साथ ही दिग्विजय सिंह द्वारा भेजे गए मैसेज का भी पलट की तरफ से कोई उत्तर नहीं दिया गया।

कांग्रेस के दिग्गज नेता सिंह ने कहा कि पायलट के पास अभी काफी उम्र है। उनकी गहलोत सरकार से नाराजगी हो सकती है लेकिन किसी भी परेशानी का हल संभव है। इसी के साथ दिग्विजय सिंह ने कहा कि महत्वाकांक्षाजरूरी है महत्वाकांक्षा के बिना कोई भी इंसान आगे नहीं बढ़ सकता लेकिन इसके साथ ही संगठन विचारधारा और राष्ट्र के प्रति भी लोगों की कुछ प्रतिबद्धता होनी चाहिए। हुए दिग्विजय सिंह ने खुलकर कहा कि सुनने में आ रहा है कि सचिन नई पार्टी बना सकते हैं। इसकी जरूरत क्या है। सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने उन्हें क्या नहीं दिया 26 की उम्र में सांसद बना दिया और 38 की उम्र तक वह कांग्रेस से उपमुख्यमंत्री बन गए। पार्टी इससे ज्यादा किसी को क्या दे सकती है। इसके साथ ही दिग्विजय सिंह ने कहा कि पायलट के लिए अच्छा यही है कि वह सब कुछ भूल कर वापस पार्टी में आ जाए। बीजेपी अविश्वसनीय पार्टी है बीजेपी में गया हुआ कोई भी नेता आज तक सफल नहीं हो पाया है।

बता दे कि मध्य प्रदेश की ही सियासी घटनाक्रम की तरह राजस्थान में भी कांग्रेसी सरकार पर संकट के बादल मंडराए हुए हैं। गहलोत सरकार से बागी तेवर इख्तियार करते हुए सचिन पायलट और उनके अर्थ समर्थक 18 विधायक पर पार्टी तोड़ने का आरोप लगा है। पायलट ने बागेश्वर अपनाते हुए पार्टी से अलग होने की बात कही थी। जिसके बाद कांग्रेसी सरकार द्वारा हम से लगातार संपर्क करने के बाद भी वह किसी से बात करने को तैयार नहीं है। जिसके बाद पार्टी ने उन्हें उप मुख्यमंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद से बर्खास्त कर दिया था। इसी बीच चर्चा है कि सचिन पायलट अपनी एक नई पार्टी बना सकते हैं क्योंकि उन्होंने भाजपा में जाने से साफ इनकार कर दिया है। देखना दिलचस्प है कि राजस्थान की सियासी घटनाक्रम मध्यप्रदेश के ही रास्ते पर चलती है या उसमें फेरबदल संभव है।