आखिर सालों बाद पूरी हुई कैलाश की भीष्म प्रतिज्ञा

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इंदौर।आकाश धौलपुरे।

तपस्या तो साधु संतों की भी खंडित हो जाती है तो आम आदमी की बात ही क्या और फिर अगर व्यक्ति राजनीति में जुड़ा हो और राजनीति भी देश के शिखर से जुड़ी हो तो फिर तपस्या को पूरा करना नामुमकिन सा लगता है। लेकिन इसे पूरा कर दिखाया है भाजपा (bjp) के राष्ट्रीय महासचिव (national general secretary) कैलाश विजयवर्गीय (kailash vijayvargiya) ने।

दरअसल 21 साल पहले (before twenty one years) कैलाश विजयवर्गीय को यह बोध हुआ था कि इंदौर ( indore) में पितृदोष है और पित्रेश्वर पर्वत के ऊपर जब तक भगवान बजरंगबली (bajrangbali) की प्रतिमा स्थापित नहीं होगी, यह दोष दूर नहीं होगा। बस वह दिन था और आज का दिन कैलाश जी ने अन्न त्याग दिया। गेहूं , ज्वार, बाजरा दालें ,सब उनकी थाली में नदारद हो गए ।21 दिनों में कैलाश जी ने अगर ग्रहण किया तो सिर्फ मोरधन, साबूदाना ,समा के चावल या फल।

कैलाश जी की धर्मपत्नी आशा भाभी ने भी इन सारे वस्तुओं से कई सारे व्यंजन बनाए और कैलाश जी को व्रत पूरा करने में मदद की। कैलाश जी देश के किसी भी कोने में जाते ,उनके दोस्त या कार्यकर्ता यह ख्याल रखते कि कैलाश जी ने अखंड व्रत लिया हुआ है और उसी के हिसाब से रेसिपी तैयार होती। शनिवार 29 फरवरी को कैलाश जी का प्रण पूरा हुआ। हनुमान प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही कैलाश जी ने महामंडलेश्लर गुरू शरणानंद जी के माध्यम से अन्य ग्रहण किया। सुनने में एक कहानी सी लगती है लेकिन यह वास्तविकता है । यदि व्यक्ति के इरादे नेक हो और संकल्प दृढ़ तो कुछ भी पूरा हो सकता है।

आखिर सालों बाद पूरी हुई कैलाश की भीष्म प्रतिज्ञा