बुजुर्गों से अमानवीयता मामले के बाद अलर्ट पर रैन बसेरे, केवल दिन का भोजन होता है मुनासिब

वही रैन बसेरा संचालक कमल तिवारी ने बताया कि आम दिनों में उनके वहां 20 से 30 लोग आते है और ठंड बढ़ने के बाद संख्या 50 तक पहुंच जाती है।

इंदौर, आकाश धोलपुरे। इंदौर नगर निगम के कर्मियों द्वारा शुक्रवार को अमानवीयता की हदे पार कर दी गई। जिसके बाद निगम के अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर ने ताजे जख्म को एक आदेश से ढंकने की कोशिश की। जिसमे उन्होंने कहा कि सर्दी के मौसम को देखते हुए निगम द्वारा शहर में बेसहाराओ के लिए रैन बसेरों की व्यवस्था की गई है।

इसी आदेश के तहत फुटपाथ पर रहने वाले बुजुर्गों को रैन बसेरों में ले जाया जाना था लेकिन मिस हेंडलिंग के चलते अचानक ये मामला सामने आ गया। जिसकी जांच की जाएगी। इधर, निगम के दावों के बाद मीडिया ने रैन बसेरों की ओर रुख किया तो इन्दौर के सरवटे बस स्टैंड के समीप स्थित आश्रय स्थल पर व्यवस्था दुरुस्त होने का दावा किया गया।

आश्रय स्थल रैन बसेरे पर संभवतः शहर की सीमा पर छोड़े जाने वाले बुजुर्गों को लाने की चर्चा भी चली थी लेकिन फिलहाल, बुजुर्गों को कहा रखा गया है ये जानकारी सामने नही आ पाई है। वही रैन बसेरा संचालक कमल तिवारी ने बताया कि आम दिनों में उनके वहां 20 से 30 लोग आते है और ठंड बढ़ने के बाद संख्या 50 तक पहुंच जाती है।

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जहां बेघर लोगो सहित अन्य लोगो के रुकने और सोने के साथ ठंड से बचने के लिए अलाव की व्यवस्था भी की जाती है। इतना ही दिन में सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक दीनदयाल अंत्योदय रसोई योजना के तहत 10 रुपये थाली का भोजन गरीब और बेसहारा लोगो को मिलता है।

रैन बसेरों के उचित रख रखाव के दावे भले ही पुख्ता हो लेकिन सवाल ये है कि जो भोजन दिन में 10 रुपये में दिया जाता है उसे रात में क्यों नही शुरू किया जाता है क्योंकि भूख की पीड़ा तो अक्सर रात में ही शुरू होती है। फिलहाल, अब ये निगम और सरकार जाने की वो क्या करना चाहती है लेकिन सवाल तो सवाल है जो उठने चाहिये ताकि व्यवस्था में बदलाव हो जिससे गरीबो और बेसहाराओ का जीवन सुगम हो सके।