भोपाल, इंदौर सहित मध्यप्रदेश के इन 7 शहरों पर हावी हुआ Air Pollution, लोगों को हो रही सांस लेने में तकलीफ

राजधानी भोपाल का एयर क्वालिटी इंडेक्स (Air Quality Index) 296 दर्ज किया गया, वहीं 26 दिसंबर को यहां का एयर क्वालिटी इंडेक्स 148 पर था

भोपाल,डेस्क रिपोर्ट। साल की शुरुआत में स्वच्छता को लेकर नंबर वन रहने वाले इंदौर और भोपाल के लोगों को खराब हवा परेशान कर रही है, जिसके चलते लोगों को सांस लेने (Inhaling) में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। ना सिर्फ भोपाल (Bhopal) और इंदौर (Indore) बल्कि प्रदेश के 7 शहरों का एयर क्वालिटी इंडेक्स बहुत खराब दर्ज हुआ है।

राजधानी में बढ़ा वायु प्रदुषण

प्रदेश की राजधानी भोपाल में अचानक वायु प्रदूषण (Air Pollution) में बढ़ोतरी देखने को मिली है। राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स (Air Quality Index) 296 दर्ज किया गया, वहीं 26 दिसंबर को यहां का एयर क्वालिटी इंडेक्स 148 पर था। रविवार को केंद्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी किए इंडेक्स में सिंगरौली प्रदेश के सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर में से एक है, यहां का एयर क्वालिटी इंडेक्स 342 नापा गया है।

अगर सागर की बात की जाए तो यहां एयर क्वालिटी इंडेक्स 62 है और सतना 104 रहा जोकि सामान्य रेट है। प्रदेश की आर्थिक राजधानी कही जाने वाली इंदौर सीटी का एयर क्वॉलिटी इंडेक्स 246 नापा गया। उज्जैन 281 तो ग्वालियर 245 दर्ज किया गया। दमोह 232, देवास 227, कटनी 267, मंडीदीप का एयर क्वालिटी इंडेक्स 289 जो कि खराब हवा की श्रेणी में आता है।

सांस लेने में हो रगी दिक्कतें

खराब एयर क्वालिटी (Bad Air Quality) के कारण प्रदेश की राजधानी भोपाल , इंदौर और बाकी के अन्य 7 शहरों में लोगों को सांस लेने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हार्ट और अस्थमा के पेशेंट को तो वैसे भी सांस लेने में दिक्कत होती है, अब ऐसे में एयर क्वालिटी खराब होने के चलते उन्हें सांस लेने में ज्यादा परेशानी की आशंका जताई जा रही है।

प्रदूषण की वजह धूल कण

प्रदेश की राजधानी भोपाल में वायु प्रदूषण (Air Pollution) की वजह धूल कण को बताया जा रहा है । धूल के कण के वजह से वातावरण में इसका काफी प्रभाव देखने को मिला है और वहीं खुले में सड़क निर्माण और अन्य किए जा रहे निर्माणों के चलते धूल के कण वातावरण में और फैल गए हैं, जिसके वजह से एयर क्वालिटी पर काफी प्रभाव पड़ा है। वहीं जब भी नमी बढ़ती है तो धूल के कण नमी के चलते निचली सतह पर बने रहते हैं जो कि स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा करते हैं। खराब हवा हृदय और अस्थमा के मरीजों के सिवा बुजुर्ग बच्चों के लिए भी हानिकारक (hazadrous) है। खराब हवा के प्रभाव से बचने के लिए बाहर निकलते वक्त मास्क पहनना जरूरी है।

प्रदूषण को कम करने के लिए लगातार किए जा रहे काम

प्रदेश के इन सात शहरों में बढ़ते हुए वायु प्रदूषण (Air Pollution) को देखते हुए पर्यावरण विशेषज्ञ बताते हैं कि किसी भी शहर का अगर एयर क्वालिटी इंडेक्स 50 तक है या इससे नीचे है तो वह शहर वायु प्रदूषण से मुक्त है। एयर क्वालिटी इंडेक्स किसी भी शहर की सेहत बताता है। एयर क्वालिटी इंडेक्स प्रदूषण का स्तर बढ़ने के साथ ही बढ़ता है और कम होने से घटता है। बढ़ते हुए प्रदूषण को देखते हुए एयर क्वालिटी इंडेक्स में गिरावट को लेकर लगातार काम किए जा रहे हैं।

सांस लेने के लिए है कितना एक्यूआई सेफ

  • अगर एक्यूआई 0-50 तक है तो हवा अच्छी हैं और उसमें प्रदूषण नहीं है।
  • अगर 51-100 एक्यूआई है तो वो सामान्य  कैटेगरी में आता है, जिसमें सेंसिटिव लोग कम से कम बाहर निकले तो ज्यादा बेहतर है।
  • वहीं 101-150 एक्यूआई है तो वो अनहेल्थी कैटेगरी में आता है जो चुनिंदा लोगों के लिए खराब होता है।
  • अगर 151-200 एक्यूआई हुआ तो वह सभी के लिए खराब है और अगर 201-300 एक्यूआई आई नापा जाता है तो वो बहुत खराब कैटेगरी में है। 301-500 एक्यूआई दर्ज किया जाए तो ये जानलेवा है  और बाहर निकलते वक्त मास्क पहनना जरूरी है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Pollution control board) की माने तो एक्यूआई 200-300 बहुत ज्यादा खराब माना जाता है,इमने सभी लोगों को सांस लेने में तकलीफ का सामना करना पड़ता है। वहीं मध्य प्रदेश के ज्यादातर शहरों में एयर क्वालिटी इंडेक्स बहुत खराब की श्रेणी में हैं। गौरतलब है कि देश की राजधानी दिल्ली के कुछ क्षेत्रो का एक्यूआई हर साल 500 से भी ज्यादा का रहता है।

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