लॉकडाउन के बीच संविदा कर्मचारियों ने शिवराज सरकार से की ये मांग

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भोपाल।शिवराज सरकार के सत्ता में आए एक हफ्ता भी नही हुआ है और संविदा कर्मचारियों में सरकार के प्रति आक्रोश व्याप्त हो गया है।म.प्र. संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने स्वास्थ्य विभाग और एनएचएम के द्वारा जारी दो आदेशों को लेकर आपत्ति जताई है।

संविदा कर्मचारियों का कहना है कि कोरोना वायरस से बढ़ते संक्रमण के बीच जिन स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए प्रधानमंत्री  ने संपूर्ण देश में तालियां बजवा कर उनका मनोबल बढ़ाया था। उन्हीं स्वास्थ्य कर्मचारियों को प्रदेश सरकार द्वारा इनाम में अनुबंधित किया जा रहा है।वही कुछ की सेवाएं समाप्त की जा रही है।कर्मचारियों का कहना है कि संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों के 3 महीने का अनुबंध बढ़ाने का आदेश स्वास्थ्य विभाग और एनएचएम ने जारी किया है।एक आदेश में प्रदेश के सिंगरौली जिले में 28 संविदा एएनएम की सेवा समाप्त कर दी गई है। जिसके बाद संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ मध्यप्रदेश में सरकार को पत्र लिखकर इन आदेशों को तुरंत प्रभाव से निरस्त करने की मांग की है।

संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ मध्य प्रदेश के प्रांत अध्यक्ष सौरव सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री, मिशन संचालक  रीवा संभाग और सीएमएचओ जिला सिंगरौली से मांग करते हुए कहा है संविदा एएनएम की बर्खास्तगी एवं मात्र 3 महीने का निबंध बढ़ाने संबंधी आदेश को जितनी जल्दी हो सके निरस्त कर दिया जाए. जिससे समस्त संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी चिंता मुक्त होकर इस महामारी को रोना से रोकथाम निदान और उपचार का कार्य सुचारू रूप से कर सकें।

ये है पूरा मामला

दरअसल, मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग और एनएचएम मध्यप्रदेश के द्वारा आज दो आदेश जारी किए गए। जिसके एक आदेश में संविदा स्वास्थ्य अधिकारियों का फिर से 3 महीने के लिए अनुबंध बढ़ाने का निर्णय दिया गया है। जहां साथ ही अभी आदेश है कि अगर किसी के ऊपर अनुशासित कार्यवाही चल रही है तो उसका  उसकी सेवा समाप्त कर दी जाए। माना जा रहा है कि इसके हिसाब से ऐसे सैकड़ों कर्मचारी होंगे जिन्हें कोई अनुशासनात्मक नोटिस प्राप्त हुई होगी किंतु अभी उस पर जांच लंबित होंगे। ऐसे में उनका अनुबंध नहीं बढ़ाया जा सकेगा। वही दूसरे आदेश में प्रदेश के सिंगरौली जिले में 28 संविदा एएनएम की सेवा समाप्त कर दी गई। वैश्विक स्तर पर फैले कोरोना महामारी प्रदेश मैं भी फैलती जा रही है। ऐसे में इन स्वास्थ्य कर्मचारियों पर इस तरह की कार्यवाही उनके साथ-साथ प्रदेश की जनता के लिए भी अहितकर है।जिसके चलते उनमें आक्रोश बढ़ रहा है।

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