अशोकनगर: अस्पताल की लापरवाही के बीच पुलिसकर्मियों की संवेदनशीलता

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अशोकनगर|हितेंद्र बुधौलिया|

कोरोना(corona) संकट के दौरान कई समस्याएं एवं उनने जुड़ी असंवेदनशीलताये सामने आ रही है।तो कुछ अधिकारी इसी दौरान व्यवस्था के खराब होते पहलू को अपने स्तर पर किसी तरह संभालने में लगे है।यह दोनों तस्वीरे रात को उस समय सामने आई जब एक बुजुर्ग के शव को उसके परिजन हाथ ठेले पर ले जाने को मजबूर हो गये।

अशोकनगर(ashoknagar) जिला चिकित्सालय में ईदगाह मोहल्ला निवासी दुर्गा प्रसाद श्रीवास्तव(durga prasad srivastava) को हार्ट अटैक(heart attack) के बाद इलाज के लिए लाया गया था ।जहां उनकी मौत हो गई। उसकी मौत के बाद उनके दोनों लड़कों ने शव को घर जाने के लिए वाहन की मांग की ।मगर उन्हें वाहन उपलब्ध नहीं हो पाया। इसके बाद वह हाथ ठेले पर अपने पिता का शव खुद ही घर पर ले जाने को मजबूर हो गए। यह असंवेदनशीलता है जिला अस्पताल की जहां एक शव को सम्मान के साथ घर तक पहुंचाने की व्यवस्था नहीं की जा सकी। ये दुःखद एवं शर्म करने की व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने बाली एक तस्वीर है। जिला चिकित्सालय से उनके दोनों बेटे जब अपने पिता का मृत शरीर हाथ ठेले पर ढोकर घर ले जा रहे थे।

इसी दौरान गांधी पार्क पर रात में ड्यूटी(duty) कर रहे तहसीलदार इसरार खान एवं सब इंस्पेक्टर राम शर्मा ने इन्हें रोका और पूरा मामला समझा तो। उन्होंने सिस्टम की खरावी की खाज पर संवेदना की मरहम लगाई। उन्होंने तुरंत 100 डायल को बुलाया और सम्मान के साथ बुजुर्ग के शव को उसके घर पहुंचाया । रात करीब 9:00 बजे के बाद सामने आई इस घटना ने कोरोना संकट के बीच की ऐसी दो तस्वीरें पेश की है। जब ना चाहते हुए भी अस्पताल की अव्यवस्था पर सवाल खड़े करना पड़ रहा है। वही दिन रात ड्यूटी कर रहे कुछ अधिकारियों ने संवेदनशील होने का परिचय दे सकता सरकारी तंत्र के प्रति लोगो के मन मे सन्तोष भी बनाये रखा।

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