Babri Demolition: आडवाणी-उमा भारती को बड़ी राहत, उच्चतम न्यायालय का “सुप्रीम” फैसला, अवमानना केस खारिज, सभी कार्यवाही बंद

सुप्रीम कोर्ट ने 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस से जुड़ी सभी याचिका और कार्यवाही को बंद करने का निर्णय दिया है।

supreme court employees officers

नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट। देश के उच्चतम न्यायालय (Supreme court) ने सुप्रीम फैसले में लालकृष्ण आडवाणी (LK Advani) सहित उमा भारती (Uma Bharti) और साध्वी ऋतंभरा को बड़ी राहत दी है। दरअसल बाबरी विध्वंस (Babri Demolition) मामले में दायर अवमानना केस को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा खारिज कर दिया गया है। मामले में स्पष्ट आदेश देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में याचिकाकर्ता का निधन हो गया है जबकि सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ द्वारा राम मंदिर बनाने का आदेश भी दिया गया।

इसलिए अब अवमानना का कोई महत्व नहीं रहता है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस से जुड़ी सभी याचिका -कार्यवाही को बंद करने का निर्णय दिया है। दरअसल अवमानना केस असलम भूरे द्वारा दायर की गई थी। जिस का निधन हो चुका है। वहीं इस मामले में मुख्य आरोपी कल्याण सिंह का निधन हो चुका हैं। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस से जुड़ी सभी कार्रवाई को बंद कर दिया है।

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान 1994 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस के कारण उत्पन्न यूपी सरकार और उनके अधिकारियों के खिलाफ अवमानना याचिका को बंद कर दिया है। इसके साथ ही गुजरात के 2002 के गोधरा (Gujarat Riot 2002) के मद्देनजर शुरू की गई सभी कार्रवाई को भी बंद करने का निर्णय लिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समय बीतने के साथ था और अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में 2019 के फैसले को देखते हुए अब अवमानना के मामले का कोई मतलब नहीं बनता है। वही 2002 के गुजरात गोधरा कांड पर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा कि अदालत के आदेश के बाद विशेष जांच दल द्वारा मुकदमा चलाए गए 9 मामलों में से 8 मेक मुकदमा खत्म होने के साथ मामले निष्फल हो गए हैं।