लॉकडाउन के बीच फुटकर व्यापारियों के बुरे दिन, हो रही सामान की किल्लत

सीहोर।अनुराग शर्मा।

कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा और लॉकडाउन की सख्ती जैसे मुश्किल समय में भी छोटे व्यपारी और असंगठित कामगार हमारी जरूरतें पूरी करने बाजार में मोर्चा संभाले हुए हैं। गली मोहल्ला के छोटे दुकानदार और हाथठेला पर सामान रखने वाले असंगठित कामगार मुश्किल समय में शहर की जरूरतों को पूरा करने में लगे हैं और घर बैठे सस्ते दाम में अच्छी सामग्री उपलब्ध कराने का दावा करने वाली मुनाफाखौर बहुराष्ट्रीय कंपनियां बाजार से गायब हैं। जोखिम के समय में हमारे अपने ही काम आ रहे हैं और लॉकडाउन जैसे ही हटेगा यह बहुराष्ट्रीय ऑनलाइन, ई-कॉमर्स कंपनी बाजार पर फिर से कब्जा कर लेंगी। ऐसे में जरूरी है कि हम आगे आने वाले अच्छे समय भी अपने मददगारों को याद रखें।

जानकारी के अनुसार शहर में करीब पांच हजार असंगठित मजदूर और पांच तीन हजार छोटे दुकानदार हैं। यह दूध, सब्जी, दवा, डेयरी, फल, प्रेस (धोबी), हेयर ड्रेसर, घर में काम करने वाले इलैक्ट्रिशयन, प्लंबर आदि का काम करते हैं। एक तरफ कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा बना हुआ है और दूसरी तरह लॉकडाउन को पुलिस पुलिस की सख्ती है, फिर भी यह लोग शहर में नियमित सेवाएं दे रहे हैं। इसमें सबसे खास बात यह है कि यह दुकानदार सामग्री महंगी किए बिना ही सेवाभाव से काम में लगे हुए हैं। बाजार में सब्जी के भाव सामान्य दिनों की अपेक्षा काफी कम हो गए हैं। स्टॉक कम है और डिमांड ज्यादा है। माल मंगाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। माल की कमी होने के कारण उधार में सामान नहीं मिल रहा है। कैश पेमेंट कर सामग्री खरीदनी पड़ रही है। लॉकडाउन के कारण पुलिस ने बाजार में चैकिंग शुरू कर दी है। गोदाम से दुकान तक सामान पहुंचाने में काफी दिक्कत आ रही है। कई बार पुलिसकर्मी रोक देते हैं।

इसी पर दुकानदार आनंद कुशवाह का कहना है कि दुकान खोलते ही दूसरों के संपर्क में आना पड़ता है। कोरोना वायरस का संक्रमण दूसरे व्यक्ति के संपर्क में आने से ही फैलता है। ग्राहक बार-बार कहने क बाद भी सोशल डिस्टेंस के नियम का पालन नहीं कर रहे हैं। दुकान पर भीड़ होने से पुलिस कार्रवाई का डर रहता है। दुकान खोलते ही ग्राहकों की भीड़ लग जाती है। पहले जब लॉकडाउन नहीं था, तब हर व्यक्ति मॉल में खरीदारी करने जाने की बात करता था। मॉल में सामान सस्ता मिलने के उदाहरण दिए जाते थे, अब जब सब बंद है तो हम जरूरत पूरी कर रहे हैं। हमने किसी भी सामग्री के दाम नहीं बढ़ाए हैं। दुकानदार रामप्रसाद अहिरवार का कहना है कि यदि इसी तरह हमारा कारोबार चले तो कभी कोई दिक्कत नहीं आए, लेकिन अब जो लोग हमारे यहां से सामन खरीद रहे हैं, वह पहले नहीं आते थे। एक तरह से बाहर की कंपनियों ने बाजार पर कब्जा जमा लिया है। इस जब मॉल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बंद हैं तो हमारा कारोबार अच्छा चल रहा है। वहीं दुकानदार धीरज नामदेव कहते हैं कि हम जान जोखिम में डालकर सामाग्री घर-घर तक पहुंचा रहे हैं। शहर के लोग परेशान नहीं हों, उनकी जरूरत पूरी करना हमारा दायित्व है। इस समय लोग हमारा इंतजार कर रहे हैं, लेकिन यह सम्मान सामान्य दिनों में नहीं मिलता है। हम संकट के समय भी बाजार में खड़े हैं। दुकानदार हरिप्रसाद मालवीय ने बताया कि सरकार को बड़ी कंपनियों से छोटे व्यापारी और असंगठित मजदूरों के काम को बचाने के लिए योजना बनानी चाहिए। इससे बेरोजगारी कम होगी और हमारा जीवन सुरक्षित रहेगा। बाहरी कंपनियां संकट के समय भाग जाती हैं, जिससे लोग परेशान होते हैं।