कमलनाथ के खुलासे के बाद VD शर्मा का बड़ा बयान, सिंधिया का समर्थन

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भोपाल।

कोरोना संकटकाल(CORONA CRISIS) के बीच एमपी(MADHYPRADESH) का सियासी पारा चरम पर है। कमलनाथ सरकार (KAMALNATH SARKAR) के जाने और शिवराज सरकार (SHIVRAJ SARKAR) के आने के बाद से ही कांग्रेस (CONGRESS)और बीजेपी (BJP) में जुबानी जंग तेजी से चल रही है।हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ(FORMER CHEIF MINISTER KAMALNATH) द्वारा कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह(CONGRESS LEADER DIGVIJAY SINGH) और बीजेपी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया (JYOTIRADITYA SCINDIA)को लेकर खुलासे के बाद प्रदेश में नई बहस छिड़ गई है।हालांकि कमलनाथ ने दिग्विजय के बयान को लेकर सफाई दे दी है, लेकिन बीजेपी इसे मुद्दा बनाकर कांग्रेस और कमलनाथ की जमकर घेराबंदी कर रही है। अब भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा(BJP PRESIDENT VD SHARMA) का कहना है कि अगर कमलनाथ समय रहते उन बातों का खुलासा करते, तो शायद तमाम विधायकों को अपनी विधायकी का बलिदान नही देना पड़ता।इधर वीडी के बयान के बाद कांग्रेस में हलचल तेज हो चली है।

वही वीडी ने नाथ से सवाल करते हुए पूछा है कि ऐसी कौन सी मजबूरी थी कि वे सरकार बनने के पहले दिन से दिग्विजय सिंह को बर्दाश्त करते रहे और अंततः सरकार गिराने का खामियाजा भुगतना पड़ा। आपने दिग्विजय सिंह के दबाव में लगातार अपने ही विधायकों और मंत्रियों का अपमान क्यों किया? आपने क्यों दिग्विजयसिंह के बेटे को कैबिनेट मंत्री बनाने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ विधायकों की राजनीति का गला घोंटा?यह जनता के सामने स्पष्ट करना चाहिए।शर्मा ने आशंका व्यक्त की कि कोई ऐसा कारण जरूर है, जिसके चलते मुख्यमंत्री के रूप में कमलनाथ ने लगातार दिग्विजय सिंह की नाजायज बातों को सहन किया। अगर कमलनाथ समय रहते उन बातों का खुलासा करते, तो शायद तमाम विधायकों को अपनी विधायकी का बलिदान नही देना पड़ता।

माफी मांगे कमलनाथ
शर्मा ने कहा कि कमलनाथ आज अपना सिर नहीं धुंन रहे होते। कमलनाथ जी आपने भारत की राजनीति में ईमानदारी और शुचिता की परंपरा कायम रखने वाले सिंधिया परिवार के मुखिया ज्योतिरादित्य सिंधिया को सड़क पर उतरने की नसीहत दे डाली। आज परिणाम सबके सामने है। सिंधिया जी की ईमानदारी और पारदर्शिता में भरोसा करने वाले उनके समर्थक विधायकों ने अपनी विधायकी को दांव पर लगाया,यह कोई मामूली बात नहीं है। कोई विधायक अथवा मंत्री तभी अपने पद का त्याग करता है, जब उसे ह्रदय की गहराइयों तक चोट पहुंचाई जाती है। अगर कमलनाथ और उनकी मंडली के भीतर नैतिकता बची हो तो सिंधिया और उन सभी मंत्री-विधायकों से माफी मांगे,जो उनके अत्याचार, अनाचार और उपेक्षा से दुखी होकर अपना मंत्री पद और विधायकी कुर्बान करने पर मजबूर हुए हैं।

सिंधिया का समर्थन
सिंधिया का समर्थन करते हुए शर्मा ने कहा कि ज्योतिरादित्य पर लाँछन लगाने वाले कांग्रेसियों को दिग्विजय को धिक्कारने की हिम्मत जुटानी चाहिए। प्रदेश की जनता को यह जानने का अधिकार है कि 18 महीने तक किसके इशारे पर प्रदेश को लूटा गया और राजनीतिक प्रतिशोध के चलते भीषण कार्यवाहियां हुई। यह अलग बात है कि कांग्रेस के मंत्री और विधायकों ने बार-बार बताया था कि शराब,रेत और खनन माफिया कौनसा पूर्व मुख्यमंत्री है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने उनका ही अपमान किया जो सच को सामने लेकर आए। ज्योतिरादित्य सिंधिया के पूरे राजनीतिक करियर में एक भी दाग नहीं है। इसके बावजूद श्री कमलनाथ ने मुख्यमंत्री के रूप में और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के रुप में भी सिंधिया को निरंतर अपमानित करने के जतन किए। इसे कोई भी स्वाभिमानी व्यक्ति सहन नहीं कर सकता ।

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