‘वक्त है बदलाव का’ अब महाराज से बड़ा आलाकमान

ग्वालियर। अतुल सक्सेना।
वाकई राजनीति बड़ी अनिश्चितता से भरी होती है एक वक्त था जब ज्योतिरादित्य सिंधिया देश और प्रदेश में राजनीति के चमचमाते सितारों थे और उनके समर्थक उनके लिए सिर कटाने तक तैयार थे लेकिन आज वक्त बदला हुआ है विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद की आस लगाए बैठे सिंधिया ना तो मुख्यमंत्री बन पाए और न प्रदेश अध्यक्ष । हालात यह हुए कि वे लोकसभा का चुनाव तक हार गए सिंधिया के नाम की कसमें खाने वाले मंत्री भी अब सोच समझकर उनके पक्ष में बयान दे रहे हैं।इसी कडी में अब प्रदेश में कांग्रेस की जीत के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया को मुख्यमंत्री बनाये जाने वाली मुहिम की अगुआई करने वाले सिंधिया के कट्टर समर्थक खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के सुर बदले बदले से हैं।

दरअसल, कमलनाथ सरकार में जिले का प्रतिनिधित्व कर रहे दो मंत्री कट्टर सिंधिया समर्थक हैं। दोनों ही मंत्री खुलकर सिंधिया का समर्थन ही नहीं करते बल्कि सिंधिया से जुड़ी किसी भी मुहिम की अगुआई भी करते हैं। लेकिन अब इनमें से एक मंत्री के सुर बदलने लगे हैं। अब तक सिंधिया की बात को आदेश मानकर सर्वोपरि कहने वाले खाद्य मंत्री राज्यसभा के मामले में पार्टी के फैसले के साथ खड़े हैं। सिंधिया को प्रदेश अध्यक्ष बनाये जाने की कई बार खुलकर बात करने वाले और उनकी हर बात को आदेश बताने वाले मंत्री तोमर इस बार खुलकर ये नहीं कह रहे कि उनके “महाराज” ही राज्यसभा जाएं।

ग्वालियर में पत्रकारों से बात करते हुए सिंधिया समर्थक कमलनाथ के मंत्री ने कहा कि राज्यसभा कौन जायेगा ये पार्टी हाई कमान तय करेगा। अब वो चाहें प्रियंका गांधी हो, सिंधिया जी हो, दिग्विजय जी हो या अन्य कोई ये पार्टी फैसला करेगी। मंत्री सज्जन सिंह वर्मा के प्रियंका गांधी को एमपी से राज्यसभा भेजे जाने की मांग पर खाद्य मंत्री ने कहा कि ये उनकी व्यक्तिगत राय हो सकती है पार्टी की नहीं। बहरहाल मंत्री तोमर के इस बार राज्यसभा के लिए खुलकर सिंधिया का नाम नहीं लेना राजनैतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है लोग इसे बदलती निष्ठा के रूप में देख रहे हैं।