राष्ट्रीय बालिका दिवस के मौके पर सीएम शिवराज करेंगे पंख अभियान की शुरुआत, जाने इसके मायने

पंख अभियान के तहत लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, शिक्षा विभाग, सामाजिक कल्याण विभाग द्वारा बच्चियों की शिक्षा स्वास्थ्य सुरक्षा को सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही इनका डेटाबेस तैयार किया जाएगा जिसके तहत इनके विकास को मॉनिटर (Monitor) किया जाएगा। इसके साथ ही किशोरियों को उनकी रुचि के हिसाब से आत्मरक्षा की ट्रेनिंग (Self Defense Training) और पंचायत स्तर पर वोकेशनल ट्रेनिंग (Vaccational Training) भी दी जाएगी।

भोपाल,डेस्क रिपोर्ट। 24 जनवरी यानी कि राष्ट्रीय बालिका दिवस (National Girl’s Day) पर ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना (Beti Bachao Beti Padhao) के तहत मध्यप्रदेश में बालिकाओं को सुरक्षा (Safety), शिक्षा (Education), स्वास्थ्य(Health) और स्वच्छता (Sanitation) के लिए जागरूक (Awareness) करने को लेकर पंख अभियान (Pankh Abhiyan) की शुरुआत की जाएगी।

पंख अभियान की शुरुआत बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के तहत होगी, जिसका उद्देश्य बालिकाओं की सुरक्षा, जागरूकता, पोषण, जानकारी, स्वच्छता और स्वास्थ्य से जुड़ी अलग-अलग गतिविधियों के माध्यम से उनका विकास सुनिश्चित करना होगा। इसके साथ ही ग्रामीण स्तर (Rural Level) पर सामुदायिक पहल करते हुए बालिकाओं को अपने विकास (Self Development) के लिए जागरूक (Aware) किया जाएगा।

अभियान के तहत लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, शिक्षा विभाग, सामाजिक कल्याण विभाग द्वारा बच्चियों की शिक्षा स्वास्थ्य सुरक्षा को सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही इनका डेटाबेस तैयार किया जाएगा जिसके तहत इनके विकास को मॉनिटर (Monitor) किया जाएगा। इसके साथ ही किशोरियों को उनकी रुचि के हिसाब से आत्मरक्षा की ट्रेनिंग (Self Defense Training) और पंचायत स्तर पर वोकेशनल ट्रेनिंग (Vaccational Training) भी दी जाएगी।

24 जनवरी यानी की राष्ट्रीय बालिका दिवस पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Chief Minister Shivraj Singh Chauhan) द्वारा पंख अभियान का शुभारंभ वर्चुअल माध्यम (Virtual media) से किया जाएगा। प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान 435 आंगनबाड़ियों और 12 वन स्टॉप सेंटर का लोकार्पण भी करेंगे। राष्ट्रीय बालिका दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना और मातृ वंदना योजना के हितग्राहियों को राशि ट्रांसफर करने के साथ ही लाड़ली लक्ष्मी योजना से लाभान्वित बालिकाओं से संवाद भी करेंगे।

बता दें कि नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (Family Health Survey) के हिसाब से प्रदेश में जन्म के समय लिंगानुपात 1000 बालक पर 927 बालिका है। वही 15 से 39 साल की महिलाओं में शिक्षा का स्तर 59.4% और एनीमिया 52.5%  है। बालिकाओं के किशोरावस्था के दौरान यह जरूरी है कि वह अपने जीवन शैली और अपने सपनों को सही ज्ञान और व्यवहारिक रूप दे सकें । इसी कड़ी में प्रदेश द्वारा इस नई पहल की शुरुआत की गई है जो किशोरियों के बहू मुख्य विकास को बढ़ावा देगी और उनके सपनों को आसमान छूने के लिए पंख बनेगी।