शैक्षणिक स्टाफ को कॉलेज उपस्थिति का फरमान, प्रोफेसर्स का आरोप- गैरकानूनी है यह आदेश

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट 

केंद्र सरकार के अनलॉक 3(Central Government Unlock 3) के दिशा निर्देश जारी करने के बाद अब कॉलेज प्रशासन(College administration) द्वारा 4 अगस्त से पूरे शैक्षणिक स्टाफ को कॉलेज(Academic Staff College) में उपस्थित होने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। जिसके बाद कॉलेज प्रोफेसर्स और स्टाफ(College professors and staff) में इस आदेश को लेकर असंतोष का भाव है। प्रोफेसर्स का कहना है कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच यह आदेश गैरकानूनी है और साथ ही यह केंद्र सरकार के निर्देशों का उल्लंघन है।

दरअसल कॉलेजों द्वारा 4 अगस्त से पूरे शैक्षणिक स्टाफ को कॉलेज में उपस्थित होने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। इस आदेश को लेकर एक तरफ जहां शिक्षक परेशान है। वहीं दूसरी तरफ हो इसे केंद्र सरकार के निर्देशों की अवहेलना बता रहे हैं। इसी बीच प्रांतीय शासकीय महाविद्यालयीन प्राध्यापक संघ के प्रांत अध्यक्ष डॉ कैलाश त्यागी का कहना है कि जिस अधिकारी ने सभी शैक्षणिक स्टाफ को बुलाने के आदेश जारी किए हैं। उस पर त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए। कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच सभी शिक्षकों को एक साथ क्यों बुलाया गया है। त्यागी का कहना है क्या निर्णय केंद्र सरकार के निर्देश का उल्लंघन के साथ-साथ शिक्षकों के जान को जोखिम में डालने वाला देश है। वही रिटायर्ड डिस्ट्रिक्ट जज आरबीएस बघेल ने कहा कि गृह मंत्रालय ने 31 अगस्त तक सभी एजुकेशन इंस्टीट्यूट को बंद रखने का आदेश जारी किया है। ऐसे में कॉलेज स्टाफ को कॉलेज बुलाए जाने का आदेश गैर कानूनी है। इधर उच्च शिक्षा विभाग के ओएसडी डॉ. धीरेंद्र शुक्ल ने कहा कि शासन के आदेश में लिखा है कि जिला प्रशासन, गृहमंत्री और राज्य शासन के निर्देशों का पालन करते हुए कॉलेजों में प्राध्यापकों को बुलाने की स्वतंत्रता है। जिसके बाद ये निर्णय लिया गया है।

बता दे कि केंद्र सरकार द्वारा 31 अगस्त तक सभी शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने के आदेश जारी किए गए हैं। जिसके बावजूद कॉलेज में शैक्षणिक स्टाफ की उपस्थिति के आदेश प्राध्यापकों द्वारा जारी कर दिए गए। ऐसी स्थिति में बड़ी संख्या में विद्यार्थी भी कॉलेज पहुंचेंगे। जहां शिक्षकों का तर्क है कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन सही से नहीं हो सकेगा। इससे एक तरफ जहां लोगों में संक्रमण का खतरा तेजी से बढ़ेगा। वहीं दूसरी तरफ केंद्र शासन के आदेश की भी अवहेलना होगी। जिसको देखते हुए आदेश का प्रस्ताव पारित करने वाले पर कार्रवाई की मांग की गई है।