शाहीन बाग : माकपा की अर्जी खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने पूछा – पीड़ित क्यों नहीं आए?

मसीडी द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर आज दोपहर 2 बजे सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें कोर्ट ने पूछा कि माकपा ने इस मामले में याचिका क्यों दायर की? कोर्ट ने कहा कि अगर कोई पीड़ित पक्ष हमारे पास आता है तो समझ आता है, क्या कोई पीड़ित नहीं है?

नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट। साउथ दिल्ली में अतिक्रमण हटाने के लिए जो अभियान चलाया रहा है, उसके खिलाफ दायर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (CPIM) पार्टी की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। सर्वोच्च न्यायालय ने फटकार लगाते हुए यह भी पूछा कि इस मामले में पीड़ितों की जगह राजनीतिक दल क्यों कोर्ट का दरवाजा खटखटा रहे है।

बता दे साउथ एमसीडी द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर आज दोपहर 2 बजे सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें कोर्ट ने पूछा कि माकपा ने इस मामले में याचिका क्यों दायर की? कोर्ट ने कहा कि अगर कोई पीड़ित पक्ष हमारे पास आता है तो समझ आता है, क्या कोई पीड़ित नहीं है?

इसके बाद CPIM पार्टी ने अपनी याचिका भी वापस ले ली।

अतिक्रमण के खिलाफ चल रहे अभियानों पर रोक नहीं लगाई गई है : सुप्रीम कोर्ट

सुनवाई के दौरान पीड़ितों के बारे में पूछे जाने पर सीनियर वकील पी सुरेंद्रनाथ ने कोर्ट को बताया कि एक याचिका रेहड़ीवालों के एसोसिएशन की भी है। जिसके जवाब में जस्टिस राव ने कहा कि तो इसके उन्हें हाईकोर्ट जाना चाहिए था। साथ यह चेतावनी भी दी कि अगर रेहड़ी वाले नियम तोड़ेंगे, तो उनको भी हटाया जाएगा।

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कोर्ट ने कहा कि जहांगीरपुरी में इसलिए दखल देनी पड़ी क्योंकि वहां पर इमारतों को गिराया जा रहा था। लेकिन रेहड़ीवाले सड़क पर सामान बेचते हैं। अगर स्थायी दुकानों को नुकसान हो रहा है तो उनको कोर्ट आना चाहिए था ना की रेहड़ी पटरी वाले को।

बिना नोटिस नहीं गिराया जा सकता अवैध निर्माण

कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से सवाल पूछा कि क्या नियम के तहत कार्रवाई करने से पहले नोटिस नहीं दिया जाता? जिसके जवाब में सॉलिस्टर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि ऐसा बिल्कुल नहीं है, बिना नोटिस कोई अवैध निर्माण नहीं गिराया जाता है।

तुषार मेहता ने कहा कि उनके पास संबंधित अधिकारी का नोटिस है, जिसमें लिखा था कि फुटपाथ से अतिक्रमण हटाने के लिए नियमों से काम किया गया है और इसमें नोटिस की जरूरत नहीं होती। सरकार की तरफ से कोर्ट को यह बताया गया कि शाहीन बाग में किसी भी रिहायशी घर को नहीं गिराया गया है।

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माकपा के वकील ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर रोक लगाई थी। जिसके जवाब में सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हमने देश में अतिक्रमण के खिलाफ चल रही हर कार्रवाई को नहीं रोका है। अगर रिहायशी मकानों को तोड़ा जाएगा तो हम दखल देंगे। लेकिन यहां मामला सड़क से अतिक्रमण हटाने का है।”