सिंधी समाज की मांग, भाषा के आधार पर भाषायी अल्पसंख्यक का मिले दर्जा

याचिका में यह कहां गया है कि सिंधी भाषा एवं सिंधी सभ्यता मध्यप्रदेश में विलुप्त होती जा रही है, जिसके चलते नई पीढ़ी पाश्चात्य संस्कृति की तरफ ज्यादा आकर्षित हो रही है। इसलिए सिंधी भाषा एवं सभ्यता के उत्थान के सिंधी समाज को भाषायी अल्पसंख्यक का दर्जा प्रदान किया जाना चाहिए जिससे, सिंधी समाज अल्पसंख्यकों को मिलने वाले लाभ ले सके।

इंदौर, आकाश धोलपुरे। गुजरात और राजस्थान की ही तरह अब मध्यप्रदेश में भी सिंधी समाज द्वारा मांग की जा रही है कि सिंधी समाज को मध्यप्रदेश में भी भाषायी अल्पसंख्यक का दर्जा प्रदान किया जाये। इस संबंध में सिंधी समाज को मध्यप्रदेश में भाषायी अल्पसंख्यक घोषित करने की याचिका भी लगाई गई है। ये पहल इंदौर सहित मध्यप्रदेश के सिंधी समाज के वरिष्ठ समाजसेवी ईश्वर झामनानी, गोपाल कोड़वानी और जयेश गुरनानी ने की है।

जानकारी के मुताबिक सिंधी समाज को मध्यप्रदेश में भाषायी अल्पसंख्यक का दर्जा प्रदान करने की याचिका इंदौर के विधि छात्र एवं यूथ कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता जयेश गुरनानी के माध्यम से मध्य प्रदेश राज्य अल्पसंख्यक आयोग में दायर की गई है। याचिका में यह कहां गया है कि सिंधी भाषा एवं सिंधी सभ्यता मध्यप्रदेश में विलुप्त होती जा रही है, जिसके चलते नई पीढ़ी पाश्चात्य संस्कृति की तरफ ज्यादा आकर्षित हो रही है। इसलिए सिंधी भाषा एवं सभ्यता के उत्थान के सिंधी समाज को भाषायी अल्पसंख्यक का दर्जा प्रदान किया जाना चाहिए जिससे, सिंधी समाज अल्पसंख्यकों को मिलने वाले लाभ ले सके।

मिली जानकारी के मुताबिक गुजरात एवं राजस्थान राज्य सरकार ने सिंधी समाज को भाषायी अल्पसंख्यक का दर्जा प्रदान कर रखा है। वही मध्यप्रदेश में सिंधी समाज की आबादी मात्र 2,45,161  है जो कि मध्य प्रदेश की कुल आबादी का मात्र 0.34% है। विधि छात्र जयेश गुरनानी द्वारा याचिका में बताया गया है कि सिंधी समाज की सभ्यता एवं भाषा किस प्रकार से अन्य सभ्यता एवं भाषाओं से भिन्न है तथा उसे वर्तमान परिदृश्य में संरक्षण की आवश्यकता है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि बंटवारे मैं सिंधी समाज ने अपना धनधान्य,  संपत्ति एवं वैभव गवा दिया था और यदि  सिंधी  समाज को भाषायी अल्पसंख्यक का दर्जा प्रदान नहीं किया जाता है तो सिंधी समाज अपनी सभ्यता एवं भाषा भी गंवा देगा। फिलहाल, याचिका पर सुनवाई मध्यप्रदेश राज्य अल्पसंख्यक आयोग द्वारा की जानी है और माना जा रहा है कि जल्द ही याचिका पर सुनवाई प्रारंभ होगी।