दिग्विजय का आरोप, वारंटी उत्पात मचाते रहे, पुलिस खुलेआम सहयोग करती रही

दिग्विजय सिंह ने शांतिपूर्ण चुनाव कराने में प्रशासन व चुनाव आयोग को पूर्ण रूप से असफल बताया

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट| पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने मतदान (Voting) के दौरान हिंसक घटनाओं को लेकर चुनाव आयोग (Election Commission) के पर्यवेक्षकों पर सवाल उठाये हैं| उन्होंने शांतिपूर्ण चुनाव कराने में प्रशासन व चुनाव आयोग को पूर्ण रूप से असफल बताया।

दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि सुमावली के वॉरंटी उत्पात मचाते रहे और पुलिस उनका खुले आम सहयोग करती रही। दिमनी के निर्दोष वोटरों को पुलिस पकड़ कर ले गई वोट भी नहीं डालने दिया। मुरैना ज़िले में गोलियां चलीं, लोगों को पीटा गया, मोटर सायंकालें जलाई गईं उसके लिए पूरी तरह से ज़िला पुलिस व प्रशासन ज़िम्मेदार है।

दलित उम्मीदवारों को बैठा लेने की क्या ज़रूरत थी
कांग्रेस नेता ने ट्वीट कर चुनाव आयोग और प्रशासन को निशाने पर लिया| उन्होंने ट्वीट कर लिखा- सुमावली में मैंने एसपी मुरैना सीईसी के पुलिस ऑब्ज़र्वर एमके दास सेवा निवृत्त डीजीपी को आगाह किया था लेकिन सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक गोली चलती रही गरीब मज़दूर व महिलाओं को वोट नहीं डालने दिया वे सुमावली थाने का घेराव करती रहीं। लेकिन दलित उम्मीदवारों को बैठा लेने की क्या ज़रूरत थी।

दलित उम्मीदवारों को बैठा लेने की क्या ज़रूरत थी
दिग्विजय ने आगे लिखा-यदि सुमावली व मेहगांव के भाजपा उम्मीदवारों (BJP Candidate) के साथ कॉंग्रेस के उम्मीदवारों (Congress Candidate) को भी जिस तरह गोहद व ग्वालियर के उम्मीदवारों को थाने में या डाक बंगले में बैठा लिया होता तो मतदान शांतिपूर्ण हो जाता। गोहद के दलित उम्मीदवारों को बैठा लेने की क्या ज़रूरत थी?

वॉरंटी उत्पात मचाते रहे और पुलिस खुलेआम सहयोग करती रही
पूर्व सीएम सिंह ने कहा सुमावली के वॉरंटी उत्पात मचाते रहे और पुलिस उनका खुले आम सहयोग करती रही। दिमनी के निर्दोष वोटरों को पुलिस पकड़ कर ले गई वोट भी नहीं डालने दिया।  जो मुरैना ज़िले में गोलीयॉं चलीं लोगों को पीटा गया मोटर सायंकालें जलाई गईं उसके लिए पूरी तरह से ज़िला पुलिस व प्रशासन ज़िम्मेदार है।

क्या उनकी जवाबदारी तय की जाएगी
दिग्विजय सिंह ने चुनाव आयोग के पर्यवेक्षकों की कार्यक्षमता पर सवाल उठाते हुए कहा ‘माननीय केंद्रीय चुनाव आयोग क्षमा करेंगे आपके मुरैना में भेजे गए IAS व IPS आब्जर्वर सूचना देने के बाद भी शांति पूर्ण मतदान नहीं करा पाए। क्या उनकी जवाबदारी तय की जाएगी? क्या ज़िला प्रशासन व ज़िला पुलिस अधिकारियों की CR में CEC का displeasure communicate किया जाएगा? देखते हैं’।

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